इजरायल ने रची थी खामेनेई की हत्या की साजिश !
इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। इजरायली रक्षा मंत्री इसराइल कैट्ज़ (Israel Katz) ने एक इंटरव्यू के दौरान बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की योजना बनाई थी। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा है। कैट्ज़ ने कहा कि इजरायली सेना को खामेनेई को टारगेट करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्हें ऐसा करने का कोई “ऑपरेशनल अवसर” नहीं मिला।
इस बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मच गई है। खामेनेई न सिर्फ ईरान के सर्वोच्च नेता हैं, बल्कि देश की धार्मिक, राजनीतिक और सैन्य नीतियों के केंद्र में भी हैं। यदि इस तरह की हत्या की योजना सच में बनी थी और सफल होती, तो यह न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के लिए युद्ध का सीधा निमंत्रण बन सकता था। इसराइल की ओर से इस तरह का स्पष्ट बयान आना कई देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
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जब कैट्ज़ से पूछा गया कि क्या इस कार्रवाई के लिए इजरायल ने अमेरिका या किसी सहयोगी देश से अनुमति मांगी थी, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसे मामलों में इजरायल को किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। यह बयान इजरायल की “स्वतंत्र सैन्य नीति” को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी इंगित करता है कि वह किसी भी हद तक जाकर अपने विरोधियों को खत्म करने की रणनीति पर चल रहा है। इस तरह की नीति वैश्विक कानूनों और संयुक्त राष्ट्र की संप्रभुता अवधारणा पर भी सवाल खड़े करती है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान का उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना और इजरायल की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करना हो सकता है। यह भी संभव है कि इजरायल खुफिया तौर पर ईरानी सैन्य और राजनीतिक ढांचे को कमजोर करने के लिए रणनीतिक प्रयास कर रहा हो। खामेनेई जैसे नेता की हत्या की योजना महज एक सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है – कि इजरायल किसी भी खतरे को खत्म करने से पीछे नहीं हटेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया भर में नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या इजरायल की यह नीति न्यायोचित है? क्या किसी देश को दूसरे देश के सर्वोच्च नेता की हत्या की योजना बनाने का नैतिक या कानूनी अधिकार है? ये सवाल अब वैश्विक मंचों पर गूंजने लगे हैं। फिलहाल, ईरान की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
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