बिहार में चोरों के हौसले बुलंद! 25 हजार वोल्ट का रेलवे तार काट ले गए, 3 घंटे तक थम गई ट्रेनों की रफ्तार |
बिहार में चोरी की घटनाएं लगातार नए और चौंकाने वाले रूप में सामने आ रही हैं। पहले मोबाइल टावर चोरी होने की खबरों ने लोगों को हैरान किया था, और अब चोरों ने रेलवे की महत्वपूर्ण विद्युत व्यवस्था को ही निशाना बना दिया है। जहानाबाद जिले में पटना-गया रेलखंड पर लगे 25 हजार वोल्ट क्षमता वाले हाईटेंशन ओवरहेड इलेक्ट्रिक तार का एक हिस्सा काटकर चोरी कर लिया गया। इस घटना ने न केवल रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण रेलवे ढांचे की निगरानी को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
जानकारी के अनुसार, चोर करीब 35 मीटर लंबा ओवरहेड तार काटकर अपने साथ ले गए। यह वही विद्युत लाइन है जिससे इलेक्ट्रिक ट्रेनों को बिजली की आपूर्ति होती है। तार कटने के कारण रेलखंड पर बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस वजह से करीब तीन घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा, जिससे कई ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा और यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे के तकनीकी कर्मचारी, इंजीनियरिंग टीम और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान मौके पर पहुंचे। सबसे पहले प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया गया और उसके बाद क्षतिग्रस्त ओवरहेड लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया गया। आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल की गई और ट्रेनों का संचालन दोबारा सामान्य किया गया। रेलवे ने प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य पूरा कर रेल यातायात को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश की।
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि 25 हजार वोल्ट की ओवरहेड विद्युत लाइन रेलवे की अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण संरचना का हिस्सा होती है। ऐसी लाइनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निगरानी की व्यवस्था रहती है। इसके बावजूद इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई, यह जांच का सबसे बड़ा विषय बन गया है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि चोरी को अंजाम देने वालों ने पहले इलाके की गतिविधियों पर नजर रखी होगी और फिर सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया होगा। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, स्थानीय लोगों से पूछताछ और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है, जो रेलवे या अन्य सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाता रहा हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे के ओवरहेड तार तांबे और अन्य मूल्यवान धातुओं से जुड़े होने के कारण कबाड़ बाजार में उनकी अवैध बिक्री की संभावना रहती है। इसी कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर रेलवे के केबल, सिग्नल उपकरण और विद्युत सामग्री की चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान होता है, बल्कि रेल संचालन और यात्रियों की सुरक्षा पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है।
इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी महत्वपूर्ण रेल लाइन पर सुरक्षा निगरानी के बावजूद चोरों का वारदात को अंजाम देना यह संकेत देता है कि सुरक्षा तंत्र की समीक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत हो सकती है। हालांकि चोरी कैसे हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे, इसका स्पष्ट जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल रेलवे प्रशासन ने रेल परिचालन को सामान्य कर दिया है, लेकिन इस घटना की जांच जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां आरोपियों तक कब पहुंचती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे कौन से अतिरिक्त सुरक्षा कदम उठाता है। क्योंकि देश की महत्वपूर्ण रेल संरचना की सुरक्षा केवल सरकारी संपत्ति का नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों की सुरक्षित यात्रा का भी सवाल है।
written by:- Anjali Mishra
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