UP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव! 75 जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, नई व्यवस्था तक संभालेंगे जिलों की कमान |
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश के सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सरकार ने उन्हें ही अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त कर दिया है। शासन की ओर से जारी आदेश के बाद अब नई जिला पंचायत व्यवस्था गठित होने तक यही अध्यक्ष अपने-अपने जिलों में प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। इस फैसले के बाद जिला पंचायतों के कामकाज को बिना किसी रुकावट के जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्षों का निर्धारित कार्यकाल समाप्त हो गया है। ऐसे में नई जिला पंचायतों के गठन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाए रखना सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी। इसी को देखते हुए मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया है। अब वे निर्वाचित अध्यक्ष के बजाय प्रशासक की भूमिका में जिला पंचायत से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे।
सरकार के इस फैसले के बाद जिला पंचायतों में विकास कार्यों, योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों की प्रक्रिया जारी रहेगी। आमतौर पर कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई व्यवस्था बनने में समय लग सकता है, ऐसे में प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए की जाती है। इससे पंचायत स्तर पर चल रहे कार्य प्रभावित न हों और जरूरी फैसले समय पर लिए जा सकें।
इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष सरकार के इस कदम को अपने नजरिए से देख सकता है, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया निर्णय है। पंचायत चुनाव और नई जिला पंचायतों के गठन तक प्रशासकों के जरिए व्यवस्था संचालित करने की प्रक्रिया कई राज्यों में अपनाई जाती रही है।
वहीं, अब चर्चा यह भी है कि ब्लॉक प्रमुखों के कार्यकाल को लेकर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। यदि ऐसा फैसला लिया जाता है, तो पंचायत स्तर की अन्य संस्थाओं में भी अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था देखने को मिल सकती है।
जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने के बाद अब सभी जिलों में पंचायत प्रशासन की जिम्मेदारी इन्हीं के हाथों में रहेगी। वे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की निगरानी और जिला पंचायत से जुड़े जरूरी फैसलों को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि उनकी भूमिका अब पहले की तरह निर्वाचित प्रतिनिधि की नहीं, बल्कि सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक की होगी।
फिलहाल सरकार के इस फैसले के बाद अगला बड़ा सवाल पंचायत चुनावों की समय-सीमा और नई जिला पंचायत व्यवस्था को लेकर है। जैसे ही चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी और नई पंचायतों का गठन होगा, उसके बाद प्रशासकों की यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। तब चुने हुए प्रतिनिधि दोबारा जिला पंचायतों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
उत्तर प्रदेश की पंचायत राजनीति में यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जिला पंचायतें ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन की अहम कड़ी होती हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई पंचायत व्यवस्था कब तक तैयार होती है और आने वाले समय में ब्लॉक प्रमुखों को लेकर सरकार क्या निर्णय लेती है।
written by:- Anjali Mishra
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