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धर्म और आस्था(Dharma-Karma)बड़ी खबर

गाजीपुर की गंगा में तैरता पत्थर !

गाजीपुर की गंगा नदी में एक चौंकाने वाला नज़ारा तब देखने को मिला जब लोगों ने नदी की धाराओं में एक बड़ा पत्थर तैरते हुए देखा। बताया जा रहा है कि पत्थर का वजन करीब 2 कुंतल है, बावजूद इसके न तो वह डूब रहा है और न ही आसानी से हिलाया जा सकता है। इस रहस्यमयी दृश्य ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है और देखते ही देखते यह पत्थर आस्था का प्रतीक बन गया।

स्थानीय श्रद्धालु इसे रामसेतु के पवित्र पत्थरों से जोड़कर देख रहे हैं और इसके चारों ओर पूजा-पाठ व अगरबत्ती जलाकर श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। कई लोग इसे “ईश्वर का चमत्कार” मान रहे हैं और दूर-दराज़ से लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि अब तक किसी वैज्ञानिक या प्रशासनिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि पत्थर किस सामग्री से बना है और कैसे पानी में तैर रहा है।

Live News X यह स्पष्ट करता है कि वह किसी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता, लेकिन यह घटना निश्चित रूप से curiosity और सामाजिक चर्चा का विषय बन चुकी है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो चुका है, जिसमें लोग पत्थर को छूते और उसकी पूजा करते नजर आ रहे हैं। कई लोगों ने इसे सनातन संस्कृति के चमत्कार से जोड़ा है, जबकि कुछ ने इसे विज्ञान से जोड़कर समझाने की कोशिश की है।

कुछ भू-वैज्ञानिकों और विज्ञान शिक्षकों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कुछ विशेष प्रकार के ज्वालामुखीय पत्थर जैसे पुमाइस (Pumice Stone) पानी में तैर सकते हैं, क्योंकि उनमें अत्यधिक मात्रा में हवा भरी होती है। हालांकि इस विशेष पत्थर की बनावट और रचना को देखकर ही कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

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स्थानीय प्रशासन भी अब इस घटना को गंभीरता से ले रहा है। भीड़ नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा के लिए घाट पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने पत्थर को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए उठाने और इसकी जांच कराने की बात कही है, ताकि तथ्यों पर आधारित जानकारी सामने लाई जा सके।

इस तैरते पत्थर ने गाजीपुर को एक नई पहचान दे दी है। धार्मिक आस्था और विज्ञान के बीच यह रहस्यमयी घटना एक बार फिर साबित करती है कि भारत में हर चमत्कार सिर्फ चमत्कार नहीं होता—वह जन-भावनाओं और ज्ञान के टकराव का एक जीवंत उदाहरण होता है।

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