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छांगुर बाबा पर बोले बृज भूषण !

गोंडा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने बलरामपुर के छांगुर बाबा प्रकरण पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बेहद व्यंग्यात्मक और मजाकिया लहजे में कहा कि वे खुद बलरामपुर से सांसद रह चुके हैं, लेकिन छांगुर बाबा को कभी नहीं पहचान पाए। उनके इस बयान ने न सिर्फ मंच पर मौजूद लोगों को चौंकाया, बल्कि सियासी गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी।

बृज भूषण ने कहा, “अब तो जांच हो रही है… कहीं ऐसा न हो कि उन्होंने हमारे साथ भी फोटो खिंचवा ली हो!” यह टिप्पणी सीधे तौर पर उन वायरल तस्वीरों और वीडियो की ओर इशारा थी, जिनमें कई नेताओं और अधिकारियों को छांगुर बाबा के साथ देखा गया है। यह कथन जाहिर तौर पर सरकार और प्रशासन की सतर्कता पर सवाल खड़ा करता है कि आखिर इतने वर्षों तक छांगुर बाबा किसकी छत्रछाया में फलते-फूलते रहे।

छांगुर बाबा इन दिनों अवैध धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। STF की जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हो चुके हैं। आरोप है कि बाबा ने धार्मिक आस्था की आड़ में सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव बनाकर अपने उद्देश्य साधे। बृज भूषण सिंह का तंज इस पूरे मामले में राजनीतिक मिलीभगत के संकेत भी देता है।

पूर्व सांसद के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विरोधी दलों ने इसे सरकार की विफलता करार दिया, वहीं सत्ताधारी पक्ष ने इसे बृज भूषण का निजी बयान बताकर किनारा करने की कोशिश की है। भाजपा के अंदर ही इस मुद्दे पर मतभेद उभरते नजर आ रहे हैं, जो आगामी चुनावी रणनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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छांगुर बाबा केस अब केवल कानून या प्रशासन का मुद्दा नहीं रह गया है, यह अब एक राजनीतिक विस्फोट बन चुका है। बृज भूषण सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का इस तरह से खुलकर बोलना इस बात की तरफ इशारा करता है कि मामला भीतर तक गहराया हुआ है। उनके बयान ने यह संदेश दिया कि अगर किसी ने आंखें मूंद रखी हैं, तो अब उन्हें खोलने का समय आ गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक संरक्षण का घालमेल कहीं सामाजिक ताने-बाने को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा। बृज भूषण का तंज अब सिर्फ बयान नहीं, एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है – कि आने वाले समय में और भी नाम, चेहरे और गठजोड़ सामने आ सकते हैं।

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