खरगे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ पर FIR! बीजेपी नेताओं पर बढ़ा कानूनी शिकंजा |
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ कराने का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कई बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ Zero FIR दर्ज की है। FIR दर्ज होने के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद से निकलकर कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।
बताया गया है कि 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली हुई थी। आरोप है कि रैली के दो दिन बाद इसी मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ कराया गया। शिकायतकर्ता ने इस कार्रवाई को जातिगत भेदभाव और अपमान से जोड़ते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS के साथ-साथ SC/ST एक्ट और नागरिक अधिकार संरक्षण कानून की धाराएं भी लगाई गई हैं। हालांकि, FIR में आरोप दर्ज होना अपने आप में आरोपों का साबित होना नहीं है। अब पुलिस जांच के दौरान पूरे मामले के तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
Zero FIR का मतलब है कि शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है, भले ही कथित घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई हो। इसके बाद मामले को जांच के लिए संबंधित क्षेत्र की पुलिस को भेजा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत यह मामला अब उत्तराखंड की संबंधित पुलिस के पास भेजा जाएगा।
इस विवाद का राजनीतिक पहलू भी काफी अहम है। कांग्रेस की ओर से इसे जातिगत अपमान और भेदभाव से जोड़कर देखा जा सकता है, जबकि बीजेपी नेताओं की ओर से मामले पर अलग पक्ष सामने आ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण किस उद्देश्य से कराया गया था और इसके पीछे आयोजकों की मंशा क्या थी। पुलिस जांच इसी तरह के सवालों के जवाब तलाशेगी और यह भी देखा जाएगा कि FIR में नामजद लोगों की इस घटना में कोई प्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं।
क्योंकि मामला SC/ST एक्ट और नागरिक अधिकार संरक्षण कानून तक पहुंच चुका है, इसलिए जांच का दायरा भी महत्वपूर्ण हो गया है। आगे पुलिस के निष्कर्ष यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या कार्रवाई आगे बढ़ती है।
फिलहाल खरगे की रैली के बाद शुरू हुआ यह विवाद Zero FIR तक पहुंच चुका है। अब सवाल सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि पुलिस जांच का भी है क्या कथित ‘शुद्धिकरण’ के पीछे वास्तव में जातिगत भेदभाव था, या फिर मामले की तस्वीर जांच के बाद कुछ और सामने आएगी?
written by:- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
