लद्दाख पर फिर आंदोलन की तैयारी! सोनम वांगचुक का सरकार को एक हफ्ते का अल्टीमेटम !
लद्दाख के मुद्दे पर सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं होने से सोनम वांगचुक ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर अगर अब भी कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आता, तो आंदोलन का रास्ता फिर से अपनाना पड़ सकता है।
सोनम वांगचुक ने सरकार को एक हफ्ते का समय देते हुए कहा है कि इस दौरान अगर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तो 19 से 24 सितंबर के बीच आंदोलन और पदयात्रा शुरू की जाएगी। यानी आने वाले कुछ दिन लद्दाख के आंदोलन की अगली रणनीति के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं।
दरअसल, लद्दाख के स्थानीय प्रतिनिधि लंबे समय से क्षेत्र को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लद्दाख के लोगों को अपने क्षेत्र से जुड़े फैसलों में ज्यादा राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
इन मांगों में लद्दाख के लिए ज्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा प्रमुख हैं। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के अधिकारों, रोजगार और जमीन से जुड़े हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी आंदोलन के केंद्र में रहे हैं।
वांगचुक का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उससे जमीन पर कोई ठोस नतीजा निकले। सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच संवाद के बावजूद अगर समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ा जाता, तो इससे लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।
अब 19 सितंबर की तारीख पर सबकी नजर रहेगी। अगर सरकार की ओर से इससे पहले कोई स्पष्ट आश्वासन सामने आता है, तो आंदोलन की स्थिति बदल सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो वांगचुक के नेतृत्व में आंदोलन और पदयात्रा का ऐलान आगे बढ़ सकता है।
लद्दाख का यह मुद्दा सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं है। क्षेत्र की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यहां राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय अधिकार और विकास से जुड़े फैसले राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सरकार एक हफ्ते के भीतर लद्दाख के प्रतिनिधियों को कोई ठोस आश्वासन देगी, या 19 सितंबर से फिर सड़कों पर आंदोलन और पदयात्रा का दौर शुरू होगा?
written by :- Anjali Mishra
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