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भारत की बात (National)

श्रीलंका के साथ भारत की दोस्ती और मजबूत! राजनाथ का बड़ा संदेश |

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का श्रीलंका दौरा भारत और श्रीलंका के रिश्तों के लिहाज से काफी अहम रहा। दौरे के आखिरी दिन से पहले बुधवार को राजनाथ सिंह ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

मुलाकात के दौरान राजनाथ सिंह ने साफ संदेश दिया कि मुश्किल समय में भारत श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने भारत की भूमिका को सिर्फ मदद तक सीमित नहीं बताया, बल्कि कहा कि श्रीलंका को संकट के समय सहायता देना भारत अपनी जिम्मेदारी मानता है।

राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को भी रेखांकित किया। भारत और श्रीलंका के बीच संबंध सिर्फ कूटनीतिक या रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सभ्यतागत और लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव भी रहा है।

दौरे के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर भी कई अहम पहल सामने आई हैं। भारत और श्रीलंका के बीच श्रीलंकाई एयरफोर्स की एयर डिफेंस गनों को अपग्रेड करने और सैन्य आदान-प्रदान एवं प्रशिक्षण बढ़ाने से जुड़े समझौते हुए हैं। इससे दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा भारत श्रीलंका की सेना के लिए AI लैब स्थापित करने में मदद करेगा। इसका इस्तेमाल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स, लॉजिस्टिक्स और निर्णय लेने जैसी क्षमताओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। यानी दोनों देशों का रक्षा सहयोग अब पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण से आगे बढ़कर नई तकनीक और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों तक पहुंच रहा है।

हिंद महासागर की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत के लिए श्रीलंका का महत्व काफी ज्यादा है। समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल भारत की Neighbourhood First नीति का भी अहम हिस्सा है।

राजनाथ सिंह की राष्ट्रपति दिसानायके से मुलाकात इसी व्यापक रिश्ते का संकेत देती है। भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि श्रीलंका की मुश्किल घड़ी में वह उसके साथ खड़ा रहेगा, जबकि दोनों देश सुरक्षा और रक्षा सहयोग को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि भारत और श्रीलंका के रिश्ते कितने पुराने हैं, बल्कि यह है कि क्या आने वाले समय में रक्षा, AI, समुद्री सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण का बढ़ता सहयोग हिंद महासागर में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा?

written by:- Anjali Mishra

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