गरबा में एंट्री पर VHP की गाइडलाइन! आधार जांच और तिलक के फैसले पर छिड़ी बहस |
महाराष्ट्र में नवरात्रि शुरू होने से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद यानी VHP ने आयोजकों के लिए कुछ सख्त गाइडलाइन जारी की हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोगों को गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में शामिल न करने की अपील भी शामिल है। संगठन के इस रुख के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
VHP की ओर से आयोजकों से एंट्री के समय प्रतिभागियों का आधार कार्ड जांचने को भी कहा गया है। इसके अलावा माथे पर तिलक लगाने की बात कही गई है। संगठन का तर्क है कि इन कदमों के जरिए आयोजनों के धार्मिक स्वरूप और सुरक्षा को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
VHP का कहना है कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रम धार्मिक आस्था से जुड़े आयोजन हैं। इसलिए आयोजकों को आयोजन की प्रकृति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश व्यवस्था तय करनी चाहिए। इसी सोच के तहत पहचान की जांच और दूसरी व्यवस्थाओं की बात कही गई है।
लेकिन इस गाइडलाइन ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। क्या किसी सार्वजनिक गरबा या डांडिया आयोजन में प्रवेश से पहले धर्म और पहचान की जांच करना उचित है? इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक बहस तक अलग-अलग राय सामने आने लगी है।
इस फैसले के समर्थक इसे धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा और पहचान से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि आयोजकों को अपने कार्यक्रम की व्यवस्था और नियम तय करने का अधिकार होना चाहिए। वहीं, आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि किसी व्यक्ति को उसके धर्म के आधार पर सांस्कृतिक आयोजन से दूर रखना सामाजिक सौहार्द और समान भागीदारी की भावना के लिहाज से कितना सही है।
आधार कार्ड की जांच और तिलक लगाने की सलाह ने विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। क्योंकि अब बहस सिर्फ गरबा में कौन शामिल हो सकता है, इस सवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि धार्मिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए या नहीं।
नवरात्रि के दौरान महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ऐसे में VHP की इस अपील का असर आयोजकों की एंट्री व्यवस्था पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। साथ ही यह भी अहम होगा कि स्थानीय प्रशासन और आयोजन समितियां इन सुझावों को किस तरह देखती हैं।
फिलहाल एक धार्मिक आयोजन को लेकर शुरू हुई यह बहस धर्म, पहचान, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द जैसे कई बड़े सवालों तक पहुंच गई है। अब सवाल यही है गरबा की धार्मिक पहचान और सुरक्षा बनाए रखने के लिए VHP की ये गाइडलाइन सही कदम हैं या फिर इससे सामाजिक दूरी और विवाद बढ़ने का खतरा है?
written by:- Anjali Mishra
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