Kolkata में SIR के खिलाफ जब BLO ही टूटने लगे, लोकतंत्र कैसे बचेगा?
कोलकाता की सड़कों पर आज एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जो बंगाल की राजनीति में शायद पहली बार हुआ। बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी चुनाव की रीढ़ माने जाने वाले BLO अपनी ही कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर सड़कों पर उतर आए। ये वही BLO हैं जिनके दम पर चुनाव आयोग हर घर तक पहुँचता है, हर वोटर की लिस्ट अपडेट होती है, और लोकतंत्र की नींव मजबूत होती है। लेकिन आज वे खुद न्याय और राहत की उम्मीद में मार्च कर रहे थे।
BLO अधिकार सुरक्षा समिति के बैनर तले ये भीड़ सीधे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर की ओर बढ़ी। हवा में नारे थे, हाथों में प्लेकार्ड, और चेहरों पर गुस्सा क्योंकि SIR प्रक्रिया ने उनकी ज़िंदगी में ऐसा दबाव भर दिया है, जिसकी वे कल्पना भी नहीं करते थे। पूरे राज्य में हज़ारों BLO लंबे समय से शिकायत कर रहे थे, लेकिन सिस्टम ने उन्हें सुना नहीं… और जब आवाज़ नहीं सुनी जाती, तो सड़कें ही अंतिम उपाय बन जाती हैं।
सबसे बड़ी मांग है SIR की डेडलाइन बढ़ाई जाए। BLO कह रहे हैं कि फॉर्म अपडेट का काम लगातार, तेज़ी से और बिना आराम के करवाया जा रहा है। घर–घर जाकर डेटा लेना, एप पर अपलोड करना, फील्ड वर्क और प्रूफ कलेक्शन ये सब इतने कम समय में मुमकिन ही नहीं। ऊपर से अधिकारियों का दबाव रोज़ बढ़ता जा रहा है, जिससे तनाव और गलतियाँ बढ़ रही हैं।
इसके बाद आती है उनकी दूसरी बड़ी चिंता गोपनीयता और सुरक्षा। BLO के अनुसार, फील्ड में अक्सर उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ उनका नाम, फोन नंबर और पहचान खुल जाती है, जिससे वे सीधे विवादों और दबाव में आ जाते हैं। वे चाहते हैं कि ECI इस सिस्टम को सुरक्षित बनाए, ताकि उनकी पहचान सार्वजनिक न हो।
तीसरी समस्या तकनीकी है ECI ऐप लगातार फेल होता है, हैंग होता है, लोकेशन कैप्चर नहीं करता, और कई बार रातों-रात BLO को घर लौटकर इसे फिर से ठीक करना पड़ता है। ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक शिकायतों के ढेर लगे हैं, लेकिन समाधान नहीं दिखता। तकनीक मदद करे तो सही, लेकिन जब वही सबसे बड़ी बाधा बन जाए तो गुस्सा स्वाभाविक है।
और फिर सबसे बड़ा आरोप अधिकारियों की “दबाव–धमकी वाली संस्कृति”। BLO कह रहे हैं कि छोटी-छोटी गलतियों पर भी उन्हें धमकाया जाता है, नोटिस पकड़ाया जाता है, और काम की बात कम, डर की भाषा ज़्यादा सुनाई पड़ती है। BLO का सीधा कहना है “काम हम करेंगे, मेहनत हम करेंगे, लेकिन अपमान नहीं सहेंगे।”
उनकी आवाज़ आज एक ही थी सम्मान चाहिए, सुरक्षा चाहिए… लोकतंत्र का सबसे निचला पहिया टूटेगा तो पूरा रथ रुक जाएगा!
अगर आने वाले दिनों में SIR प्रक्रिया में राहत नहीं मिली, तो ये आंदोलन बंगाल से निकलकर पूरे देश में भी लहर बन सकता है… और तब चुनाव आयोग के लिए हालात संभालना और मुश्किल हो जाएगा।
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