📅 Tuesday, July 14, 2026 ☁ 30°C · Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

Uncategorized

यूजीसी एक्ट 2026: छात्रों में रोष, लखनऊ विश्वविद्यालय में धरना-प्रदर्शन !

यूजीसी एक्ट 2026 की नई गाइडलाइन को लेकर छात्रों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर सैकड़ों छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया और अपनी असंतोष जाहिर किया। छात्रों का कहना है कि नए नियम शिक्षा व्यवस्था में विभाजन पैदा करेंगे और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने जोर-शोर से “यूजीसी रोल बैक” के नारे लगाए और चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

छात्रों का कहना है कि यह नया एक्ट सिर्फ कुछ खास वर्ग के फायदे के लिए बनाया गया है और इससे आम छात्रों की पढ़ाई और कैरियर पर बुरा असर पड़ेगा। उनका आरोप है कि नियमों में जो बदलाव किए गए हैं, वे शिक्षण संस्थानों के संचालन और छात्रों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इस दौरान छात्रों ने कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज़ को अनसुना नहीं करना चाहिए और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाना चाहिए।

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने धरना-प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा कि यूजीसी की नई गाइडलाइन संस्थानों में भेदभाव को बढ़ावा देगी। उनका मानना है कि नियमों के कारण उच्च शिक्षा तक पहुंच केवल कुछ विशेष समूहों तक सीमित रह जाएगी, जबकि आम छात्रों के अवसर घटेंगे। छात्रों ने अपने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर यह संदेश भी दिया कि शिक्षा का अधिकार सभी के लिए समान होना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन और सरकार से सीधी मांग की कि वे यूजीसी एक्ट 2026 को तुरंत रद्द करें या इसमें बदलाव करें। उन्होंने कहा कि यह एक्ट न केवल छात्रों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए हानिकारक है। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करेंगे।

इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यूजीसी विनियम-2026 को भाजपा की चाल करार दिया और कहा कि इस तरह के नियम पीडीए समाज को कोई फायदा नहीं पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि ज्यादातर संस्थानों पर गैर-पीडीए वर्ग का ही कब्जा बना रहेगा, जिससे समाज में असमानता और बढ़ेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे छात्रों और शिक्षकों की भावनाओं का सम्मान करें और नियमों में बदलाव करें।

सपा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यह एक्ट सिर्फ दिखावे का है और इससे शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने छात्रों की बात नहीं सुनी, तो राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसका असर गहरा होगा। उनका यह भी कहना है कि छात्रों का विरोध न्यायसंगत है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूजीसी एक्ट 2026 के नियमों में जो बदलाव किए गए हैं, वे लंबी अवधि में छात्रों और शिक्षण संस्थानों के हित में नहीं हैं। उनका मानना है कि नए नियम शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच मतभेद बढ़ा सकते हैं और शिक्षा तंत्र में असमानता को जन्म दे सकते हैं। विशेषज्ञों ने प्रशासन को सुझाव दिया कि वे छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लें और एक्ट में पारदर्शी बदलाव करें।

धरना-प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल विरोध नहीं बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी आवाज़ को अनसुना किया, तो आंदोलन और भी व्यापक और तेज होगा। छात्रों की यह चेतावनी प्रशासन और सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

इस तरह यूजीसी एक्ट 2026 के नए नियमों को लेकर छात्रों का रोष तेज होता जा रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय का यह धरना सिर्फ शुरुआत है, और अगर मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल सकता है। छात्रों का संदेश स्पष्ट है: शिक्षा सबके लिए समान होनी चाहिए और विभाजनकारी नियम समाज को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

written by :- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *