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यूपी आवास विकास के हजारों फ्लैट खाली: महंगे दाम बने सबसे बड़ी बाधा !

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के सामने इन दिनों एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। परिषद के पास करीब 7000 से ज्यादा फ्लैट अब भी बिक नहीं पाए हैं, जिनमें लखनऊ के लगभग 2333 फ्लैट शामिल हैं।

इन फ्लैट्स के न बिक पाने की सबसे बड़ी वजह उनकी ऊंची कीमतें बताई जा रही हैं। आम लोगों की आय और बाजार की मांग के मुकाबले कीमतें ज्यादा होने के कारण खरीदार इन प्रॉपर्टीज से दूरी बना रहे हैं।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में खरीदार किफायती और लोकेशन के हिसाब से बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में अगर कीमतें प्रतिस्पर्धी नहीं होंगी, तो बिक्री पर असर पड़ना तय है।

इस स्थिति को देखते हुए परिषद के अधिकारियों ने कुछ छूट देने का प्रस्ताव भी रखा था, ताकि बिक्री को बढ़ावा मिल सके। लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा सका है।

बोर्ड बैठक में 15% तक की छूट देने की योजना पर चर्चा हुई, लेकिन इसे फिलहाल टाल दिया गया है। इससे यह साफ है कि विभाग अभी भी कीमतों को लेकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

इन फ्लैट्स के लंबे समय तक खाली रहने से परिषद पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। रखरखाव और अन्य खर्चों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, खरीदारों का कहना है कि अगर कीमतों में कमी या आसान भुगतान योजनाएं लाई जाएं, तो इन फ्लैट्स की मांग बढ़ सकती है।

यह मामला अब केवल बिक्री का नहीं, बल्कि नीति और बाजार के बीच तालमेल का बन गया है। सही रणनीति के बिना इन फ्लैट्स को बेचना मुश्किल होता जा रहा है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के लिए यह एक बड़ा टेस्ट बन गया है—जहां उसे कीमत, छूट और बाजार की मांग के बीच संतुलन बनाकर समाधान निकालना होगा।

written by :- Anjali Mishra

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