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अब नहीं चलेगी ढिलाई: तहसीलों-कलेक्ट्रेटों में 5 साल पुरानी फाइलों की होगी जांच, सीधे CM तक जाएगी रिपोर्ट !

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को तेज और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश की तहसीलों और कलेक्ट्रेटों में वर्षों से लंबित पड़े मुकदमों और फाइलों पर सख्त नजर रखी जाएगी। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पांच साल या उससे ज्यादा समय से पेंडिंग मामलों की जांच होगी और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां कार्रवाई तय मानी जा रही है। फरवरी महीने में पूरे प्रदेश में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिससे सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली की असली स्थिति सामने आ सके।

इस अभियान की खास बात यह है कि सिर्फ कागजी समीक्षा नहीं होगी, बल्कि अधिकारी खुद दफ्तरों में बैठकर रिकॉर्ड जांचेंगे। मुख्य सचिव एस. पी. गोयल के आदेश पर मंडलायुक्त और जिलाधिकारी सीधे तहसील और कलेक्ट्रेट स्तर पर पहुंचकर फाइलों की पड़ताल करेंगे। इसका मकसद यह समझना है कि आखिर इतने लंबे समय तक मामले लंबित क्यों रहे और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

सरकार की मंशा साफ है कि जनता से जुड़े मामलों में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जमीन विवाद, राजस्व मामले, प्रमाण पत्र, नामांतरण और अन्य प्रशासनिक कामों में लंबा इंतजार लोगों की सबसे बड़ी शिकायतों में रहा है। ऐसे में यह अभियान आम लोगों को राहत देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि फाइलें तेजी से निपटती हैं तो इसका सीधा असर जनता के भरोसे पर भी पड़ेगा।

इसी क्रम में महीने के आखिर तक मंडल स्तर पर भी सख्त निरीक्षण देखने को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कलेक्ट्रेट का औचक निरीक्षण करेंगे, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों में पहले से ही हलचल बढ़ गई है। अचानक निरीक्षण का उद्देश्य यही है कि जमीनी हकीकत बिना किसी तैयारी के सामने आ सके और कामकाज की असली स्थिति का आकलन किया जा सके।

सबसे अहम बात यह है कि निरीक्षण की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी जाएगी। यानी इस बार समीक्षा सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं रहेगी, बल्कि शीर्ष स्तर पर निगरानी होगी। इससे प्रशासनिक मशीनरी पर जवाबदेही का दबाव बढ़ना तय है और अधिकारी भी काम में तेजी दिखाने को मजबूर होंगे।

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा संकेत है। लंबे समय से लंबित मामलों की वजह से आम लोगों को कई बार न्याय और सुविधा पाने में देरी होती रही है। यदि यह अभियान प्रभावी साबित होता है तो सरकारी व्यवस्था की छवि में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन सेवाओं और ई-गवर्नेंस पर जोर बढ़ा है, लेकिन जमीनी स्तर पर फाइलों की धीमी गति अब भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में फिजिकल निरीक्षण के जरिए कामकाज की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश प्रशासनिक सुधार के व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।

अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी इस अभियान को लेकर गंभीरता देखी जा रही है, क्योंकि अब सीधे जवाबदेही तय होने की संभावना है। कई जगहों पर पुराने मामलों को तेजी से निपटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, ताकि निरीक्षण के दौरान कमियां सामने न आएं।

कुल मिलाकर, सरकार का यह संदेश साफ है कि अब प्रशासनिक कामकाज में लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। जनता से जुड़े मामलों को समय पर निपटाना ही प्राथमिकता है और यदि कहीं भी कमी मिली तो कार्रवाई तय मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह अभियान उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में कितना बदलाव लाता है, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।

written by :- Anjali Mishra

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