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खुद को दलितों का रक्षक बताने वाले चंद्रशेखर आज़ाद की सच्चाई !

आज कल देश में दलितों आपलसंख्यको को लेकर विवाद चल रहा है लेकिन कही न कही भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने दलितों की लिए हमेशा से ही आवाज उठाई और उनके हक़ के लिए आज भी लड़ रहे है, लेकिन कहते है ना राजनीती में कौन कब अपना रुख बदल ले कुछ कह नहीं सकते। हालही में चंद्रशेखर का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसे लेकर कई सवाल उठ रहे है की आखिर “जो नेता खुद को दलितों का रक्षक बताते है, वो शाही सवारी क्यों और कैसे कर सकते है, दरअसल भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि उनकी शाही सवारी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में चंद्रशेखर आज़ाद अमेरिका की सड़कों पर करीब 12 करोड़ रुपये की रोल्स रॉयस फैंटम से उतरते नजर आ रहे हैं। मुस्कुराते चेहरे और स्टाइलिश अंदाज़ के साथ उनका यह वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया है। जिन्हें अब तक ‘दलितों की आवाज़’ कहा जाता था, उन्हें अब लोग ‘वंचितों का विलासी नेता’ कहकर पुकार रहे हैं। वीडियो में आप देख सकते है की आज़ाद के साथ कुछ विदेशी और भारतीय समर्थकों की मौजूदगी है, पर असली सवाल तो ये उठ रहा है की — क्या ये दौरा सामाजिक मिशन का हिस्सा है या निजी ब्रांड चमकाने की कोशिश? ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोगों ने तीखे सवाल दागे हैं कई यूजर्स उन्हें ‘दलितों का रॉबिनहुड’ बता रहे हैं जबकि कुछ आलोचक तंज कसते हुए पूछ रहे हैं कि जो नेता खुद को वंचितों की आवाज कहते हैं वे इतने महंगे अंदाज में कैसे घूम सकते हैं? आलोचना करते हुए आज़ाद को लेकर ये कहा गया की “जो नेता खुद को दलितों का रक्षक बताते है, वो करोड़ों की गाड़ी में घूम रहा है — ये कैसी समानता है? चंद्रशेखर आज़ाद, जो अपने भाषणों में सामाजिक न्याय, आरक्षण और दलित अधिकारों की बातें करते हैं, अब आलोचकों के लिए विलासिता और पाखंड के प्रतीक बनते जा रहे हैं। विरोधी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है, और आम जनता के बीच भी अब यह चर्चा गर्म है कि क्या नेता बनने का मतलब अब सिर्फ इमेज बिल्डिंग और विदेश यात्राओं तक सीमित रह गया है?

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