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“खाद की किल्लत, किसानों की भारी भीड़ – कालाबाजारी तेज”

पीलीभीत में खाद की भारी किल्लत
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ज़िले में इस समय किसान खाद की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि ज़रूरतमंद किसान पूरी रात जागकर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। सरकारी केंद्रों पर सीमित स्टॉक और लंबी कतारों ने कृषि सीज़न की तैयारियों में बाधा डाल दी है।

रात से ही लगी लंबी कतारें
दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों किसान नवीन मंडी के IFFCO सेंटर पर सुबह 3 बजे से ही लाइन में लगने लगे। उम्मीद थी कि सुबह-सुबह खाद मिल जाएगी, लेकिन घंटों इंतज़ार के बाद भी कई किसानों को निराशा ही हाथ लगी। कुछ किसानों के अनुसार, इंतज़ार में उनका पूरा दिन बर्बाद हो रहा है, जबकि खेत में बुआई का समय निकलता जा रहा है।

प्राइवेट दुकानों पर कालाबाजारी
सरकारी केंद्रों पर स्टॉक खत्म होते ही किसानों के पास प्राइवेट दुकानों का रुख करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन यहां हालात और भी खराब हैं — प्राइवेट विक्रेता खाद की थैलियां ओवर रेट पर बेच रहे हैं। जो खाद 266.50 रुपये में मिलनी चाहिए, वह 300 रुपये या उससे ज़्यादा में बेची जा रही है।

किसानों की बढ़ी मुश्किलें
महंगी खाद और लंबी लाइनें किसानों की जेब और मेहनत, दोनों पर भारी पड़ रही हैं। कई किसान तो यह भी कह रहे हैं कि इस बार अगर समय पर खाद नहीं मिली तो उनकी फसल का उत्पादन सीधा-सीधा प्रभावित होगा। छोटे किसान, जिनके पास भंडारण की सुविधा नहीं है, वे सबसे ज्यादा परेशानी में हैं।

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प्रशासन पर उठे सवाल
लगातार शिकायतों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज़ के बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नज़र नहीं आई है। किसान सवाल कर रहे हैं कि आखिर स्टॉक की कमी क्यों है और कालाबाजारी पर रोक क्यों नहीं लग रही।

समाधान की मांग
किसानों का कहना है कि सरकार को तत्काल अतिरिक्त खाद का स्टॉक भेजना चाहिए और प्राइवेट दुकानों पर सख्त छापेमारी करनी चाहिए। साथ ही, वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए टोकन सिस्टम या ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग जैसे उपाय अपनाने की ज़रूरत है। जब तक यह नहीं होता, तब तक पीलीभीत के किसानों की परेशानियां खत्म होती नज़र नहीं आ रहीं।

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