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शमी-हसीन विवाद ने लिया नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, 10 लाख गुजारा भत्ता मांग से बढ़ी हलचल !

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहान के बीच लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला पहले भी कई कानूनी और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोपों के कारण चर्चा में रहा है, लेकिन अब इसमें नया मोड़ तब आया जब हसीन जहां ने सीधे Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया। इस कदम ने पूरे मामले को और हाई-प्रोफाइल बना दिया है और क्रिकेट फैंस से लेकर कानूनी विशेषज्ञों तक सभी की नजरें इस पर टिक गई हैं।

हसीन जहां ने अपनी याचिका में मांग की है कि घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ते से जुड़े मामलों की सुनवाई कोलकाता से हटाकर नई दिल्ली ट्रांसफर की जाए। उनका तर्क है कि न्याय प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुविधाजनक बनाने के लिए स्थान परिवर्तन जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की भी मांग की है, जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

वर्तमान में अदालत द्वारा तय की गई रकम लगभग 4 लाख रुपये प्रतिमाह बताई जाती है, लेकिन हसीन जहां ने इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति माह करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि शमी की आय और जीवनशैली को देखते हुए यह राशि उचित है और उनके तथा बेटी के भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है। यह मांग सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस का भी विषय बन गई है।

इस विवाद की जड़ें कई साल पुरानी हैं, जब हसीन जहां ने शमी पर घरेलू हिंसा, प्रताड़ना और मैच फिक्सिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि क्रिकेट से जुड़े आरोपों में शमी को बाद में क्लीन चिट मिल गई थी, लेकिन वैवाहिक विवाद कानूनी रूप से जारी रहा। इस दौरान एफआईआर दर्ज हुई, गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ और विभिन्न अदालतों में सुनवाई भी हुई।

हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं हो सका, जिसके कारण मामला लगातार आगे बढ़ता गया। अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद यह केस एक निर्णायक मोड़ पर माना जा रहा है। अदालत ने नोटिस जारी कर दिया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जिससे आने वाले समय में महत्वपूर्ण कानूनी बहस देखने को मिल सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में दो मुख्य पहलू अहम होंगे पहला, केस ट्रांसफर करने का आधार कितना मजबूत है, और दूसरा, गुजारा भत्ते की राशि तय करने में किन आर्थिक तथ्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। अदालत आमतौर पर आय, जीवन स्तर और आश्रितों की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला करती है।

क्रिकेट जगत में भी इस मामले पर चर्चा जारी है, क्योंकि शमी भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं और उनका करियर लगातार सक्रिय है। ऐसे में व्यक्तिगत विवाद का सार्वजनिक छवि पर असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि शमी की ओर से पहले भी कई बार आरोपों को खारिज किया जा चुका है।

सामाजिक दृष्टिकोण से भी यह केस महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें घरेलू हिंसा, महिला अधिकार और वैवाहिक जिम्मेदारियों जैसे मुद्दे जुड़े हुए हैं। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा मामला मानते हैं, जबकि कुछ इसे वैवाहिक विवाद का निजी पहलू बताते हैं। यही कारण है कि जनमत भी दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आता है।

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि वही तय करेगा कि केस किस शहर में चलेगा और गुजारा भत्ते की राशि में बदलाव होगा या नहीं। आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल विवाद में जो भी फैसला आएगा, उसका असर सिर्फ दोनों पक्षों पर ही नहीं बल्कि ऐसे मामलों की कानूनी दिशा पर भी पड़ सकता है।

written by :- Anjali Mishra

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