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सत्ता का संग्राम (Politics)

SIR पर सियासत सुलग उठी! अखिलेश की चेतावनी गाना मत बनाना… वोट छीनने की साजिश चल रही है!

यूपी में SIR (Suspected Invalid Registrations) को लेकर सियासी तूफ़ान थमने का नाम नहीं ले रहा। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि SIR के नाम पर सरकार एक बड़ी चाल चल रही है ऐसी चाल जिसमें हजारों-लाखों लोगों के वोट देने के अधिकार पर सीधा हमला हो सकता है। अखिलेश का कहना है कि वोटर लिस्ट की जांच के नाम पर वोट काटने की साजिश जारी है, और यह लोकतंत्र के खिलाफ सबसे खतरनाक कदम है।

अखिलेश यादव ने पत्रकारों के सामने यह भी कहा कि SIR का असली मकसद जनता को डराना और विपक्षी वोटबैंक को कमजोर करना है। उनकी तर्क यह है कि चुनाव से पहले इस तरह की कवायद हमेशा संदिग्ध रहती है और यह चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा “सरकार बहाना ढूंढ रही है वोट काटने का, लेकिन हम इसे होने नहीं देंगे।”

लेकिन असली राजनीतिक चिंगारी तब भड़की जब अखिलेश ने बिहार चुनाव के विवादित गानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा “वैसे गाने मत बना देना।” यह बयान सीधे-सीधे बीजेपी के प्रचार तंत्र और सोशल मीडिया वार रूम पर निशाना था। बिहार चुनाव में RJD के खिलाफ बने डांस-रैप गानों ने बड़ा विवाद खड़ा किया था, और आरजेडी नेतृत्व ने हार के बाद उन 32 गायकों को नोटिस भी भेजा था, जो उस कंटेंट से जुड़े थे।

अखिलेश ने पत्रकारों और जनता से भी अपील की कि अगर चुनाव के दौरान कोई वायरल गाने या वीडियो बनते हैं तो उन्हें SP की राय या बयान ना समझा जाए। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे कंटेंट अक्सर विपक्ष को बदनाम करने के लिए बनाए जाते हैं और बाद में प्रोपेगेंडा की तरह फैलाए जाते हैं। उनका निशाना उसी ट्रेंड पर था जिसने बिहार चुनाव में कथित रूप से बड़ा असर डाला था।

SIR के जरिए वोट काटे जाने के आरोपों से बीजेपी भी घिरने लगी है, क्योंकि विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जा रहा है। अखिलेश का कहना है कि सरकार हर हाल में सत्ता बचाने की कोशिश में है, और इसके लिए लोकतांत्रिक अधिकारों से खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट पर इतनी सख्ती क्यों? क्या इसके पीछे कोई ‘छिपा हुआ एजेंडा’ है?

राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि SIR मुद्दा चुनावों के ठीक पहले बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है। एक तरफ बीजेपी इसे वोटर लिस्ट को साफ करने की प्रक्रिया बता रही है, तो दूसरी ओर SP और विपक्ष इसे ‘वोट बैंक कटाई अभियान’ बता रहे हैं। चुनावी माहौल में इस तरह के आरोप वैसे भी आग में घी का काम करते हैं।

यूपी की राजनीति वैसे ही गर्म रहती है, लेकिन SIR के बहाने यह जंग अब और तीखी हो चुकी है। अखिलेश की चेतावनी, गानों का जिक्र, और बिहार चुनाव की याद इन सबने मिलकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल को उबाल पर ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कितना बड़ा रूप लेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

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