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किसान मसीहा महात्मा टिकैत की 90वीं जयंती पर सिसौली में हवन और श्रद्धांजलि समारोह !

किसानों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए संघर्ष करने वाले महात्मा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जी का नाम भारतीय कृषि आंदोलन में विशेष स्थान रखता है। वे किसान मसीहा के रूप में जाने जाते हैं और उनके आदर्श आज भी किसानों और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी जयंती हर वर्ष किसानों और समर्थकों द्वारा श्रद्धांजलि देने के रूप में मनाई जाती है।

आज सिसौली-उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर स्थित किसान भवन में महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत जी की 90वीं जयंती के अवसर पर हवन और विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से आए क्षेत्रीय किसान और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने हवन में आहुति अर्पित की और अपने किसान मसीहा को श्रद्धांजलि दी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत जी ने कहा कि वे सभी मिलकर किसानों के उत्थान और उनके अधिकारों के लिए सदैव समर्पित रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि किसान टिकैत जी के विचारों और मार्गदर्शन को अपनाना ही आज के समय में किसानों के लिए सबसे बड़ा योगदान होगा।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत जी ने अपने भाषण में कहा कि अपने किसान मसीहा महेंद्र सिंह टिकैत जी के बताए रास्ते पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 17 अक्टूबर को पूरे उत्तर प्रदेश में किसान अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन देंगे।

कार्यक्रम में शामिल अन्य वक्ताओं में युद्धवीर सिंह ने भी भाषण दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से आंदोलन और जागरूकता का फैलाव समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना जागरूकता और सक्रिय भागीदारी के एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण असंभव है।

इस प्रकार महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत जी की जयंती का आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं था, बल्कि यह किसानों में एकजुटता, आंदोलन की भावना और जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी बना। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि किसान टिकैत जी के आदर्श और मार्गदर्शन आज भी युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि सिसौली में आयोजित यह जयंती समारोह महात्मा टिकैत जी के योगदान को याद करने, किसानों की एकता और उनकी मांगों को मजबूती देने का प्रतीक बना। यह आयोजन समाज में जागरूकता फैलाने और किसानों के हितों के लिए नए सिरे से प्रेरित करने में सहायक रहा।

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