📅 Wednesday, July 15, 2026 ☁ 30°C · Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

Uncategorized

TMC में कथित बगावत का दावा: 20 सांसदों के अलग होने की चर्चा, सियासी हलचल तेज !

यह दावा फिलहाल राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया चर्चाओं पर आधारित प्रतीत होता है और इसकी किसी आधिकारिक संसदीय या पार्टी स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में जब इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के पार्टी छोड़ने या अलग गुट बनाने की बात सामने आती है, तो उसे गंभीरता से जांचे बिना तथ्य मान लेना उचित नहीं होता।

दावा किया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसद पार्टी नेतृत्व से अलग होकर “नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी” में विलय करने की तैयारी में हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर अलग बैठने की व्यवस्था मांगी है। यह भी कहा जा रहा है कि यह समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए एनडीए के साथ काम करने का इरादा रखता है। हालांकि इस तरह के दावों की पुष्टि न तो संसद सचिवालय ने की है और न ही संबंधित सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।

इस पूरे विवाद में काकोली घोष दस्तीदार के नाम से जो बयान जोड़ा जा रहा है, उसमें कहा गया है कि यह संख्या दो-तिहाई से अधिक है और यह “बड़ा राजनीतिक विभाजन” हो सकता है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि इतने बड़े स्तर की पार्टी टूट या दल-बदल की प्रक्रिया भारतीय कानून में बहुत जटिल होती है और इसके लिए औपचारिक दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत स्पष्ट प्रक्रियाएं और स्पीकर की भूमिका जरूरी होती है।

अगर किसी भी दल के दो-तिहाई सांसद वास्तव में अलग गुट बनाते हैं, तो वह कानूनी रूप से “विलय” (merger) के रूप में माना जा सकता है, लेकिन इसके लिए औपचारिक दस्तावेज, पार्टी की मान्यता और लोकसभा अध्यक्ष की स्वीकृति जरूरी होती है। बिना इन प्रक्रियाओं के सिर्फ पत्र या बयान से किसी भी सांसद का दल बदलना संवैधानिक रूप से मान्य नहीं होता।

इस कथित घटनाक्रम में पूर्व क्रिकेटर और सांसद युसुफ पठान का नाम भी जोड़ा जा रहा है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से या संसद में उनकी सदस्यता स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उनका नाम फिलहाल केवल चर्चाओं और अटकलों तक सीमित माना जाना चाहिए।

इसी तरह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपे जाने की बात भी कही जा रही है, लेकिन संसद की ओर से इस तरह के किसी सामूहिक दल-बदल या सीटिंग व्यवस्था परिवर्तन की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे मामलों में स्पीकर का कार्यालय ही अंतिम निर्णय लेता है और सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही कोई कदम उठाया जाता है।

कुल मिलाकर यह पूरा मामला फिलहाल अफवाह, राजनीतिक बयानबाजी और अपुष्ट दावों के दायरे में दिखाई देता है। भारतीय राजनीति में अक्सर दल-बदल और गुटबाजी की खबरें सामने आती हैं, लेकिन किसी भी बड़े दावे को तब तक सच नहीं माना जा सकता जब तक आधिकारिक पुष्टि, पार्टी स्टेटमेंट या संसदीय रिकॉर्ड सामने न आ जाए।

written by:- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *