अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर! ट्रंप ने कहा- ‘ईरान फेल्ड नेशन’, परमाणु हथियार पर भी दिया जवाब |
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव में बदलता दिख रहा है। 30 अगस्त को अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इन लॉन्चरों का इस्तेमाल समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में किया जा रहा था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
इस नए टकराव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बेहद तीखा हमला बोला। ट्रंप ने ईरान को “फेल्ड नेशन” यानी असफल राष्ट्र बताते हुए दावा किया कि उसकी सैन्य क्षमता बुरी तरह कमजोर हो चुकी है और उसकी अर्थव्यवस्था भी गंभीर संकट में है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए और संकेत दिया कि अमेरिका आर्थिक और सैन्य दबाव जारी रखेगा।
इसी बीच ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की संभावना को पूरी तरह खारिज करता है, तो उन्होंने परमाणु हमले की जरूरत से ही इनकार किया। उनका तर्क था कि अगर ईरान पहले ही उनके मुताबिक सैन्य रूप से पराजित है, तो परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच फिर से मिसाइल और सैन्य हमलों का सिलसिला शुरू हुआ है।
ईरान की ओर से भी जवाब बेहद आक्रामक रहा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में किंग हुसैन और अल-अज्रक एयरबेस को निशाना बनाया। वहीं जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। यानी हमले के प्रभाव और नुकसान को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर बना हुआ है।
इस पूरे संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। दुनिया के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद इस इलाके में शिपिंग को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ा है और ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई।
हालांकि, दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बावजूद कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि अगर अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं पर वापस लौटता है, तो ईरान भी तुरंत जवाब देने के लिए तैयार है। यानी एक तरफ मिसाइल और सैन्य कार्रवाई जारी है, तो दूसरी तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की संभावना भी बनी हुई है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह सीमित सैन्य टकराव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में न बदल जाए। अमेरिका ने ईरान को और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि ईरान पहले ही जवाबी हमले कर चुका है। जॉर्डन और UAE जैसे देशों तक संघर्ष की आंच पहुंचना बताता है कि इसका दायरा केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता।
कुल मिलाकर, लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला, ईरान की जवाबी मिसाइलें और ट्रंप की ‘फेल्ड नेशन’ वाली टिप्पणी ने अमेरिका-ईरान तनाव को फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। परमाणु हथियार के सवाल पर ट्रंप ने फिलहाल उसकी जरूरत से इनकार किया है, लेकिन सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला चिंता बढ़ा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या दोनों देश इस टकराव को सीमित रख पाएंगे या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शुरू हुआ संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व को फिर बड़े युद्ध की ओर धकेल देगा?
written by:- Anjali Mishra
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