TRE-4 पर पटना में बवाल, छात्रों की मांगों पर सरकार के सामने बड़ी चुनौती !
पटना में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर छात्रों का आंदोलन मंगलवार को और उग्र हो गया। गर्दनीबाग में लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और CRPF के साथ उनकी झड़प हुई। जेपी गोलंबर और डाकबंगला इलाके में बैरिकेडिंग लगाकर छात्रों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान एक छात्र के सिर में चोट लगने और एक छात्रा के बेहोश होने की खबर सामने आई।
छात्रों के आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा TRE-4 की परीक्षा का पैटर्न है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि परीक्षा को PT और Mains के दो चरणों में कराने के बजाय एक ही परीक्षा के जरिए भर्ती की जाए। इसके अलावा नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग भी प्रमुख है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को सरल और अभ्यर्थी हित में बनाया जाना चाहिए। TRE-4 के दो चरणों और नेगेटिव मार्किंग को लेकर उनका विरोध पिछले कई दिनों से जारी है।
छात्रों की मांग सिर्फ TRE-4 तक सीमित नहीं है। वे BSSC संविदा कर्मियों के वेटेज को खत्म करने, BSSC CGL-4, BSO और AEDO की परीक्षा तारीख घोषित करने, लाइब्रेरियन और BET भर्ती शुरू करने तथा खाली पदों पर जल्द भर्ती की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही 100 प्रतिशत डोमिसाइल लागू करने, सरकारी भर्तियों में उम्र सीमा में छूट और दरोगा-सिपाही समेत दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई जा रही है। यानी आंदोलन अब एक परीक्षा के बजाय बिहार की पूरी भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई सवालों को सामने ला रहा है।
विवाद को और हवा BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह के बयान से मिली। छात्रों के प्रदर्शन को लेकर उनकी ओर से की गई ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’ वाली टिप्पणी को अभ्यर्थियों ने अपमानजनक बताया। इसके बाद विवाद बढ़ा और परीक्षा नियंत्रक ने अपने बयान पर माफी मांगी। लेकिन छात्रों का आंदोलन थमा नहीं। बाद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा नियंत्रक को निलंबित करने के निर्देश दिए।
सरकार की ओर से छात्रों की शिकायतें सुनने के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ और हेल्पलाइन जैसी पहल की भी जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि विद्यार्थियों की समस्याओं को सुना जाएगा। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से TRE-4 के परीक्षा पैटर्न और सिलेबस को लेकर BPSC को सुझाव दिए जाने की भी बात सामने आई है। हालांकि, परीक्षा को पूरी तरह एक चरण में कराने और सभी मांगों को स्वीकार करने पर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।
छात्रों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट और ठोस फैसला चाहते हैं। उनका तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार बदलाव, लंबी प्रक्रिया और अनिश्चितता से अभ्यर्थियों को मानसिक और आर्थिक परेशानी होती है। इसलिए वे एक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार के सामने चुनौती यह है कि छात्रों की जायज मांगों पर समाधान निकाला जाए और साथ ही भर्ती परीक्षाओं की गुणवत्ता और निष्पक्षता भी बनी रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पटना की सड़कों पर बढ़ता छात्र आंदोलन सरकार को TRE-4 के परीक्षा पैटर्न पर बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर करेगा? परीक्षा नियंत्रक के निलंबन और छात्रों की शिकायतें सुनने की पहल के बाद सरकार ने संकेत जरूर दिए हैं कि वह मामले को गंभीरता से ले रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें सिंगल परीक्षा, नो नेगेटिव मार्किंग, 100% डोमिसाइल और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत ही इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेगी।
written by:- Anjali Mishra
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