दुर्गा पूजा पर बंगाल में बवाल! मटन से 11 हाथ वाली दुर्गा तक छिड़ी बहस !
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले धार्मिक परंपराओं और खान-पान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें नवरात्रि के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ने की बात कही गई थी। शमिक ने साफ कहा कि बाहर से आया कोई धार्मिक व्यक्ति बंगाल के लोगों के खान-पान और पहनावे का फैसला नहीं कर सकता।
शमिक भट्टाचार्य ने बंगाल की स्थानीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि यहां लोगों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। उन्होंने कहा कि बंगाली परिवारों में अष्टमी पर पूरी और नवमी पर मटन खाने की परंपरा रही है। उनका तर्क है कि बंगाल की संस्कृति और खान-पान को किसी दूसरे क्षेत्र की परंपराओं के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।
यही बयान अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। एक तरफ इसे बंगाल की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और खान-पान की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व के दौरान मांसाहार को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं की चर्चा भी तेज हो गई है।
विवाद सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं है। मां दुर्गा के 11 हाथ वाले सरकारी विज्ञापन को लेकर भी विवाद सामने आया। विज्ञापन में देवी दुर्गा के चित्रण को लेकर सवाल उठे और मामला बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई।
मां दुर्गा की पारंपरिक छवि को लेकर बंगाल में विशेष भावनात्मक जुड़ाव है। इसलिए सरकारी विज्ञापन में देवी के स्वरूप को लेकर हुई गलती ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों तरह की प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। इसके बाद सरकार की ओर से सफाई और माफी ने विवाद को शांत करने की कोशिश जरूर की, लेकिन मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।
एक ही समय में सामने आए इन दोनों मामलों ने दुर्गा पूजा से पहले बंगाल की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को फिर केंद्र में ला दिया है। खान-पान, पहनावा, पूजा की परंपराएं और देवी के स्वरूप जैसे विषय अब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बंगाल की धार्मिक परंपराएं देश के दूसरे हिस्सों से कई मामलों में अलग रही हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नवरात्रि में क्या खाना चाहिए, बल्कि यह भी है कि अलग-अलग राज्यों और समुदायों की स्थानीय परंपराओं का सम्मान किस तरह किया जाए।
फिलहाल दुर्गा पूजा से पहले बंगाल में मटन, नवरात्रि और मां दुर्गा के 11 हाथ वाले विज्ञापन को लेकर बहस तेज है। एक तरफ परंपरा और स्थानीय संस्कृति की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ धार्मिक भावनाओं और आस्था का सवाल उठ रहा है। अब बड़ा सवाल है क्या धार्मिक त्योहारों की परंपराएं पूरे देश में एक जैसी होनी चाहिए, या हर क्षेत्र की अपनी सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिलना चाहिए?
written by :- Anjali Mishra
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