जयशंकर का बड़ा बयान! बोले- तेल रोकने से नहीं, बातचीत से खत्म होगी जंग |
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का रुख एक बार फिर साफ किया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाने से यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं होगा। उनके मुताबिक युद्ध का समाधान आर्थिक दबाव या प्रतिबंधों से ज्यादा बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जा सकता है।
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी तेल बिक्री को सीमित करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है। भारत का रुख हालांकि शुरुआत से ही यह रहा है कि युद्ध का स्थायी समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अगर भारत की भूमिका दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में मदद कर सकती है, तो भारत मध्यस्थता के लिए तैयार है। यानी भारत खुद को किसी एक पक्ष के साथ खड़ा करने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की भूमिका में देख रहा है।
भारत की इस सोच के पीछे उसकी लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक नीति भी दिखाई देती है। भारत ने कई मौकों पर कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच विवाद का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। भारत दोनों देशों के बीच संवाद और शांति की कोशिशों का समर्थन करता रहा है।
तेल का मुद्दा भी इस पूरी बहस में काफी अहम है। रूस भारत के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों तथा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने की बात करता रहा है। ऐसे में सिर्फ तेल खरीद रोकने को युद्ध खत्म करने का समाधान मानने पर भारत ने सवाल उठाया है।
जयशंकर के बयान का एक अहम पहलू भारत की संभावित मध्यस्थ भूमिका भी है। अगर भविष्य में रूस और यूक्रेन दोनों भारत की किसी पहल को स्वीकार करते हैं, तो भारत बातचीत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि मध्यस्थता तभी प्रभावी होगी जब दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार हों।
इस पूरे मामले में भारत का संदेश काफी स्पष्ट नजर आता है दबाव बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है कि युद्ध में शामिल पक्षों के बीच संवाद का रास्ता खुले। क्योंकि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध का असर सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
कुल मिलाकर, जयशंकर के बयान ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की कूटनीतिक सोच फिर सामने रख दी है। भारत प्रतिबंधों और दबाव के बजाय बातचीत को समाधान का रास्ता मान रहा है और जरूरत पड़ने पर दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ाने में भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यानी भारत का संदेश साफ है जंग का स्थायी रास्ता मैदान से नहीं, बातचीत की मेज से निकल सकता है।
written by:- Anjali Mishra
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