‘पितृसत्ता खत्म करो’ पर राहुल को घेरा, रिजिजू-हिमंत ने उठाए बड़े सवाल !
राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता खत्म करो’ वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए महिला अधिकारों और सामाजिक समानता को लेकर कांग्रेस नेता से कई सवाल पूछे। रिजिजू ने कहा कि अगर महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण की बात हो रही है, तो यह मुद्दा किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू समाज को ही निशाना बनाकर पितृसत्ता की चर्चा क्यों की जा रही है और बाकी समुदायों की महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी समान रूप से आवाज क्यों नहीं उठाई जाती।
रिजिजू ने खास तौर पर अल्पसंख्यक महिलाओं और तीन तलाक जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उनका कहना था कि अगर महिलाओं के अधिकारों की चिंता है, तो हर धर्म और हर समुदाय की महिलाओं के अधिकारों की बात समान रूप से होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि महिला सशक्तिकरण को लेकर उनका रुख सभी समुदायों के लिए एक जैसा क्यों नहीं दिखाई देता। रिजिजू का तर्क था कि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई को राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि समाज में बेटियों को कमतर आंकने वाली सोच को खत्म करना जरूरी है। उनके मुताबिक, महिलाओं और बेटियों के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसी राजनीति होनी चाहिए जो समाज को जोड़ने का काम करे, न कि अलग-अलग समुदायों के बीच विभाजन पैदा करे। रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को इसी संदर्भ में चुनौती देते हुए उनसे व्यापक और समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।
इसी मुद्दे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। सरमा ने सवाल उठाया कि अगर राहुल गांधी सामाजिक कुरीतियों और महिला अधिकारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तो वह शरिया से जुड़ी कुछ प्रथाओं पर अपना रुख स्पष्ट क्यों नहीं करते। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति और उनके सामाजिक मुद्दों पर लिए जाने वाले रुख को लेकर सवाल खड़े किए।
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि महिला अधिकारों की बात करते समय समाज के हर हिस्से में मौजूद उन प्रथाओं पर चर्चा होनी चाहिए, जो महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता को प्रभावित करती हैं। उनका कहना था कि यदि किसी राजनीतिक नेता का उद्देश्य वास्तव में महिला सशक्तिकरण है, तो उसे सभी समुदायों के संदर्भ में समान मानदंड अपनाने चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी से शरिया से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी स्थिति साफ करने को कहा।
राहुल गांधी के बयान और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया ने महिला अधिकारों के मुद्दे को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। एक तरफ राहुल गांधी पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ आवाज उठाने की बात कर रहे हैं, वहीं बीजेपी नेता सवाल कर रहे हैं कि यह विरोध हर समुदाय और धर्म की महिलाओं के संदर्भ में समान रूप से क्यों नहीं दिखाई देता। दोनों पक्षों की बयानबाजी के बीच महिला अधिकार और सामाजिक सुधार का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
इस विवाद में एक अहम सवाल यह भी है कि महिला सशक्तिकरण को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय समाज के सभी वर्गों में समान अधिकारों और अवसरों के मुद्दे पर कैसे आगे बढ़ाया जाए। महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी, सुरक्षा और समान अधिकार जैसे मुद्दे किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। इसलिए इस बहस का व्यापक सामाजिक पहलू भी है।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता खत्म करो’ वाले बयान ने बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का मौका दिया है। किरेन रिजिजू ने अल्पसंख्यक महिलाओं और तीन तलाक का मुद्दा उठाया, जबकि हिमंत बिस्वा सरमा ने शरिया से जुड़ी प्रथाओं पर राहुल गांधी से सवाल किया। अब इस बयानबाजी के बीच सियासी बहस और तेज होती दिख रही है और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच महिला अधिकारों और सामाजिक सुधार को लेकर और तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
written by:- Anjali Mishra
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