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डोडा में बदल रही सुरक्षा की तस्वीर! अब गांव-गांव तैयार होंगे Village Defence Guards, सेना सिखा रही हथियार और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग |

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भारतीय सेना ने स्थानीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसके तहत ग्रामीणों को Village Defence Guards (VDG) के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आत्मरक्षा के लिए तैयार करना, स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और किसी भी आपात स्थिति में प्रारंभिक स्तर पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाना है।

सेना द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीणों को हथियारों का सुरक्षित और जिम्मेदाराना उपयोग सिखाया जा रहा है। इसके साथ ही आत्मरक्षा की तकनीक, गांव की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और बेसिक कॉम्बैट स्किल्स का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोग सुरक्षा बलों के साथ समन्वय बनाकर अपने क्षेत्र की सुरक्षा में सहयोग कर सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल हथियार चलाने तक ही सीमित नहीं रखा गया है। प्रतिभागियों को आपात परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने, सुरक्षा संबंधी बुनियादी रणनीतियों और सामुदायिक सतर्कता के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर बंकर निर्माण और सुरक्षात्मक ढांचे तैयार करने जैसे पहलुओं पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

यह पहल विशेष रूप से उन गांवों में शुरू की गई है, जो 1990 के दशक में उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित रहे थे। उस दौर में डोडा और आसपास के कई क्षेत्रों ने लंबे समय तक आतंकवादी गतिविधियों और हिंसा का सामना किया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए सेना स्थानीय समुदायों को सुरक्षा के प्रति अधिक सक्षम और जागरूक बनाने पर जोर दे रही है।

भारतीय सेना का मानना है कि स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी किसी भी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। VDG के रूप में प्रशिक्षित ग्रामीण अपने गांवों में सतर्कता बनाए रखने, संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना देने और आपात स्थिति में शुरुआती स्तर पर सुरक्षा बलों की मदद करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

सेना के अनुसार, इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण मिलने से स्थानीय लोगों में अपने गांव और परिवार की सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत होता है तथा वे किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में अधिक तैयार रहते हैं।

हालांकि, Village Defence Guards की भूमिका सुरक्षा एजेंसियों का स्थान लेना नहीं है। उनका कार्य सुरक्षा बलों के सहयोगी के रूप में स्थानीय स्तर पर सतर्कता बनाए रखना और आवश्यक जानकारी साझा करना है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी सुरक्षा अभियान की जिम्मेदारी पहले की तरह सुरक्षा एजेंसियों के पास ही रहती है।

फिलहाल डोडा में शुरू किया गया यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो इससे न केवल संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है, बल्कि स्थानीय समुदायों और सुरक्षा बलों के बीच सहयोग और विश्वास भी और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

written by :- Anjali Mishra

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