📅 Thursday, July 16, 2026 ☁ 32°C · Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

AdministrationSocial Mediaअपराध की गूंज (Crime)

“रवि बाजपेई का ‘रिमोट कंट्रोल राज’: करोड़ों के टेंडर, रिश्तेदारों की कंपनियां और अफसरों की चुप्पी!”

कानपुर की सियासत में एक नया चेहरा सत्ता का असली चेहरा बन चुका है—नाम है रवि बाजपेई। सांसद के प्रतिनिधि के रूप में नामित इस शख्स ने खुद को पूरे संसदीय क्षेत्र का सुपर CM बना लिया है। सांसद का पदनाम तो जैसे नाम का रह गया है, असली फैसले तो रवि बाजपेई की मर्ज़ी से होते हैं।

PWD से लेकर नगर निगम, RES से लेकर जलकल—हर विभाग में विकास कार्यों के करोड़ों रुपए के टेंडर उन्हीं कंपनियों को मिलते हैं, जिनका सीधा संबंध रवि बाजपेई या उनके परिवार से है। सूत्रों के अनुसार, अब तक करोड़ों रुपए के टेंडर विभिन्न विभागों में सिर्फ उनके इशारों पर बांटे जा चुके हैं। टेंडर तय करने से लेकर कार्यदायी संस्था चुनने तक का पूरा तंत्र ‘बाजपेई एंड फैमिली प्राइवेट लिमिटेड’ जैसा दिखता है।

यहाँ तक कि ‘दिशा’ जैसी विकास योजना की उच्च स्तरीय बैठकों में खुद सांसद नहीं, बल्कि रवि बाजपेई शामिल होते हैं और कानपुर के विकास की ‘दिशा’ अपने निजी हितों के मुताबिक तय करते हैं। विकास की आड़ में दलाली और लेन-देन की कहानियाँ हर विभाग की दीवारों से फुसफुसा रही हैं—लेकिन अधिकारी मौन हैं।

Also Read: “अखिलेश यादव का संकल्प: ‘सामाजिक न्याय के राज’ से ही बदलेगा देश का भविष्य”

लोकतंत्र के नाम पर यह किस तरह का प्रतिनिधित्व है? जब सांसद स्वयं निष्क्रिय हों और प्रतिनिधि सारी ताकत अपने हाथ में लेकर सरकारी धन का बंदरबांट करते नजर आए, तो जनता किससे सवाल करे?

कानपुर आज एक ऐसे प्रतिनिधि के कब्जे में है जिसने न सिर्फ जनप्रतिनिधि की सीमा लांघी है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी अपने ठेकेदाराना रवैये से शर्मसार कर दिया है। सवाल ये नहीं है कि रवि बाजपेई कौन हैं, सवाल ये है कि उन्हें ये अपार ताकत दी किसने?

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *