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चीनी के बाद प्याज ने बढ़ाई चिंता, 76% तक उछले थोक भाव !

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच अब प्याज के दामों में तेजी ने भी आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र की नासिक मंडी में पिछले करीब एक महीने के दौरान प्याज के थोक भाव में लगभग 76 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कीमतें बढ़कर 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गई हैं। प्याज की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी ने व्यापारियों से लेकर उपभोक्ताओं तक चिंता बढ़ा दी है।

इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह खरीफ प्याज की बोआई में हुई देरी बताई जा रही है। इस बार खरीफ प्याज की बोआई करीब 15 दिन पीछे चल रही है। इसका सीधा असर नई फसल की टाइमिंग पर पड़ सकता है। जब नई फसल बाजार में तय समय पर नहीं पहुंचती और पुराना स्टॉक लगातार कम होता जाता है, तो बाजार में उपलब्ध प्याज की मात्रा पर दबाव बढ़ने लगता है।

दूसरी तरफ रबी प्याज की आवक भी फिलहाल कमजोर बताई जा रही है। पुराने स्टॉक में लगातार कमी आने के बावजूद नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में अभी समय लग सकता है। यही अंतर बाजार में प्याज की तत्काल उपलब्धता को प्रभावित कर रहा है। यानी इस समय समस्या यह नहीं है कि देश में प्याज बिल्कुल नहीं है, बल्कि मौजूदा मांग के मुकाबले बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज पहुंच नहीं पा रहा है।

नासिक मंडी में थोक कीमतों का करीब 76 प्रतिशत बढ़ना इसी सप्लाई गैप का संकेत माना जा रहा है। मंडी में आवक कमजोर होने पर उपलब्ध प्याज के भाव बढ़ने लगते हैं और इसका असर धीरे-धीरे दूसरे बाजारों तक भी पहुंच सकता है। अगर नई फसल की आवक में और देरी होती है तो आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका जताई जा सकती है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि देश में प्याज के कुल उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं है। सरकार के मुताबिक 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा तेजी को सीधे तौर पर देश में प्याज की भारी कमी से जोड़ना सही नहीं होगा। फिलहाल मुख्य समस्या उत्पादन से ज्यादा बाजार में उपलब्ध स्टॉक और नई फसल की आवक के समय को लेकर दिखाई दे रही है।

प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी सब्जी के दाम बढ़ने का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ता है। घर की रसोई से लेकर होटल, ढाबे और खाद्य कारोबार तक प्याज की कीमतों में बदलाव का असर दिखाई देता है। ऐसे में अगर थोक भाव लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं तो इसका असर खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है और उपभोक्ताओं को प्याज के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

कुल मिलाकर, चीनी के बाद प्याज की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। नासिक मंडी में एक महीने में करीब 76 प्रतिशत की तेजी के बावजूद फिलहाल देश में कुल उत्पादन की तस्वीर बहुत खराब नहीं बताई जा रही है। असली चुनौती पुराना स्टॉक घटने, खरीफ प्याज की बोआई में देरी और नई फसल की कमजोर या देर से होने वाली आवक की है। अगर नई फसल समय पर बाजार में पहुंचती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन तब तक प्याज की महंगाई आम आदमी की रसोई के लिए परेशानी बनी रह सकती है।

written by :- Anjali Mishra

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