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जब ‘बीमार’ पड़ जाते हैं भगवान! कोटा के 300 साल पुराने मंदिर की अनोखी परंपरा ने खींचा लोगों का ध्यान |

राजस्थान के कोटा में स्थित ऐतिहासिक जगदीश मंदिर अपनी एक बेहद अनोखी और सदियों पुरानी परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहां हर साल ऐसी धार्मिक मान्यता निभाई जाती है, जिसे सुनकर लोग हैरान भी होते हैं और आस्था से जुड़ भी जाते हैं। इस मंदिर में मान्यता है कि भीषण गर्मी के दौरान विशेष अभिषेक और भोग के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, इसलिए उन्हें विश्राम दिया जाता है।

करीब 300 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान का विशेष अभिषेक किया जाता है। मंदिर में 51 जल कलशों और पंचामृत से भगवान का स्नान कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह अभिषेक अत्यंत शुभ माना जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।

अभिषेक के बाद भगवान को लगभग 200 किलो आम रस का भोग लगाया जाता है। गर्मी के मौसम में आम रस को शीतलता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से यह भोग इस परंपरा का विशेष हिस्सा बन चुका है।

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, भीषण गर्मी में ठंडे जल से स्नान और अधिक मात्रा में आम रस ग्रहण करने के बाद भगवान “अस्वस्थ” हो जाते हैं। इसी कारण मंदिर के पट 14 दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं ताकि भगवान विश्राम कर सकें।

इन 14 दिनों के दौरान मंदिर में नियमित दर्शन नहीं होते और इसे भगवान के स्वास्थ्य लाभ का समय माना जाता है। श्रद्धालु भी इस परंपरा को गहरी आस्था और श्रद्धा के साथ स्वीकार करते हैं।

धार्मिक परंपराओं में भगवान को मानव भावनाओं और जीवन से जोड़कर देखने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में दिखाई देती है। कहीं भगवान को जगाया जाता है, कहीं उन्हें सुलाया जाता है, तो कहीं उनके स्वास्थ्य और विश्राम की भी विशेष व्यवस्था की जाती है।

जगदीश मंदिर की यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से खास है, बल्कि यह भारतीय आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की गहराई को भी दर्शाती है। यही वजह है कि हर साल इस अनोखी मान्यता को देखने और समझने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

आस्था, परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव का यह अनोखा संगम ही इस मंदिर को बाकी धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देता है।

written by:- Anjali Mishra

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