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राम नगरी में सोने सी चमक मंदिर पूरा, आस्था चरम पर!

अयोध्या से आज एक ऐसी खबर आई है, जिसने हर रामभक्त के दिल में गर्व और उत्साह को चरम पर पहुँचा दिया। विवाह पंचमी के शुभ दिन, अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के भव्य शिखर पर ध्वज फहराया और इसी क्षण को तीन मंजिला राम मंदिर के निर्माण पूर्ण होने का प्रतीक माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक घड़ी को देखने के लिए अयोध्या मानो स्वर्ग सा दिखाई देने लगा। लेकिन इसी के बीच एक सवाल सबके मन में है अंततः इस भव्य राम मंदिर में कितना सोना लगा है? जवाब सुनकर आपको हैरानी भी होगी और गर्व भी!

कहा जा रहा है कि रामलला के इस दिव्य धाम में करीब 45 किलो शुद्ध सोना लगा है मंदिर के शिखर से लेकर गर्भगृह के पवित्र द्वारों तक और रामलला के सिंहासन से लेकर उनकी अलौकिक झांकी तक। लगभग 56 करोड़ रुपये की कीमत का यह सोना सिर्फ वास्तु का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रृद्धा और संस्कृति की चमक को दर्शाता है। इसे देखने के बाद हर भक्त की आंखें आश्चर्य और भक्ति से भर जाती हैं।

मंदिर के शिखर के कलश पर जो सोना जड़ा हुआ है, वह सूर्य की पहली किरण के साथ ऐसी तेजस्विता बिखेरता है कि पूरा परिसर स्वर्णिम आभा में नहाया हुआ प्रतीत होता है। यही नहीं, गर्भगृह के पवित्र द्वारों की सजावट में भी सोने की परतें लगाई गई हैं, जो प्रवेश करते ही मन में ईश्वर की उपस्थिति का गहरा अहसास कराती हैं।

मंदिर के प्रथम तल पर जहाँ राम दरबार स्थापित है श्रीराम, सीता माता, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और बजरंगबली उनकी प्रतिमाओं के मुकुट और आभूषणों में भी शुद्ध सोना इस्तेमाल किया गया है। इन आभूषणों का निर्माण महीनों की तपस्या और शिल्पकारी का परिणाम है, जो भारतीय कला की अद्वितीय विरासत को दर्शाता है। भक्तों के अनुसार, इन प्रतिमाओं को देखने भर से मन में दिव्यता और शांति की अनुभूति होती है।

रामलला के सिंहासन पर लगा सोना सिर्फ भौतिक वैभव नहीं, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने वाली भावना का प्रतीक है। मंदिर निर्माण में दुनिया भर से आए दान, सेवा, समर्पण और वर्षों की प्रतीक्षा का यह प्रतिफल आज राम भक्तों की आंखें भर देता है। यह स्वर्णिम सज्जा इस बात की गवाही है कि जब राष्ट्र एक होकर आस्था में जुड़ता है, तो वह चमत्कार रच देता है।

अयोध्या इन दिनों महोत्सव जैसा माहौल लिए हुए है हर दिशा में जय श्री राम की गूंज, रामपथ पर सजे दीप, और मंदिर की ऊँचाई से चमकता सोना। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आत्मा का शिखर है।

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