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सत्ता का संग्राम (Politics)

‘भाजपा किसी की सगी नहीं!’ अखिलेश यादव का बड़ा हमला, सहयोगी दलों के नेताओं पर स्टिंग विवाद को लेकर साधा निशाना |

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। एक कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगी दलों के नेताओं को ही राजनीतिक रूप से कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में दावा किया कि भाजपा को अपने सहयोगी दलों के नेताओं से कोई विशेष लगाव नहीं है, बल्कि उसकी दिलचस्पी केवल उन नेताओं से जुड़े वोट बैंक में है। उन्होंने कहा कि भाजपा कथित तौर पर पहले सहयोगी दलों के नेताओं को बदनाम कराती है और फिर उनके समर्थक समाजों से सीधे समर्थन मांगने की कोशिश करती है। सपा प्रमुख का आरोप है कि यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा यह संदेश देने की कोशिश करती है कि सहयोगी दलों के नेता भ्रष्ट हैं और अपने समाज का हित नहीं कर सकते, इसलिए मतदाताओं को सीधे भाजपा का समर्थन करना चाहिए। हालांकि अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा की यह रणनीति सफल नहीं होगी क्योंकि “पीडीए समाज” पूरी मजबूती के साथ समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा है।

अपने पोस्ट में सपा प्रमुख ने “पीडीए” यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक गठजोड़ आगामी राजनीतिक लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह वर्ग एकजुट होकर सपा के पक्ष में मतदान करेगा और भाजपा की रणनीति को सफल नहीं होने देगा।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए यह भी लिखा कि पार्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी की सगी नहीं है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा, “जो करते हैं अपने कबीले से दगा, उनका भला और कौन होगा सगा।” इस टिप्पणी को भाजपा और उसके सहयोगी दलों के रिश्तों पर सीधा हमला माना जा रहा है।

सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में यह भी संकेत दिया कि कथित स्टिंग विवाद से जुड़े नेताओं का राजनीतिक भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने लिखा कि इस पूरे घटनाक्रम से संबंधित नेताओं की राजनीति समाप्ति की ओर बढ़ सकती है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को हाल के राजनीतिक विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार बयानबाजी तेज हो रही है। ऐसे में सोशल मीडिया पर नेताओं के तीखे हमले और आरोप-प्रत्यारोप आने वाले समय की राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी माने जा रहे हैं।

फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान पर भाजपा या उसके सहयोगी दलों की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इतना तय है कि इस पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, क्योंकि चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

written by :- Anjali Mishra

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