Friday, September 11, 2026 27.2° Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

Uncategorized

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बसंत पंचमी पर संगम स्नान से इंकार, विवाद बना सुर्खियों में !

प्रयागराज माघ मेले में इस बार बसंत पंचमी के पावन पर्व पर भी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया। विवाद के बाद शंकराचार्य अपने फैसले पर अड़े हुए हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे स्नान के लिए तभी जाएंगे, जब उन्हें पहले की तरह पूरा सम्मान मिलेगा। उनका यह फैसला माघ मेले के धार्मिक और सामाजिक माहौल में नई बहस को जन्म दे रहा है।

शंकराचार्य ने विवाद और बढ़ते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कालनेमि कहकर संबोधित किया, जिससे राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। इस बयान ने जनता और मीडिया दोनों में सनसनी फैला दी। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बसंत पंचमी के मौके पर शंकराचार्य से संगम में स्नान करने का अनुरोध किया।

Live News X से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि केशव मौर्य के बयान से उन्हें राहत जरूर मिली है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर उनकी नाराज़गी अब भी बरकरार है। उनका यह स्पष्ट रवैया दर्शाता है कि शंकराचार्य केवल सम्मान और परंपरा के अनुसार ही अपनी धार्मिक गतिविधियों में भाग लेना चाहते हैं।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह विवाद न केवल धार्मिक क्षेत्र में बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। शंकराचार्य की मांग कि उन्हें सम्मान के साथ ही स्नान की अनुमति मिले, परंपरा और धार्मिक प्रोटोकॉल की अहमियत को दिखाती है। वहीं, राजनीतिक हस्तक्षेप और विवाद ने इसे संवेदनशील मुद्दा बना दिया है।

सामाजिक प्लेटफॉर्म और मीडिया पर इस विवाद को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग शंकराचार्य के निर्णय को धार्मिक अधिकार का सम्मान मान रहे हैं, तो कुछ आलोचना कर रहे हैं कि यह स्थिति धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा कर रही है। इस बहस ने माघ मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक अहमियत को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।

धार्मिक और राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक प्रतिष्ठा और सम्मान किसी भी समारोह में कितनी अहमियत रखते हैं। शंकराचार्य ने यह भी साबित कर दिया कि धार्मिक नेता अपने निर्णय में अडिग रहते हैं और परंपरा के अनुसार ही कदम उठाते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का असर माघ मेले के अन्य आयोजनों और श्रद्धालुओं पर भी पड़ रहा है। लोग शंकराचार्य के निर्णय और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं। वहीं प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल में विशेष ध्यान दिया है ताकि मेले का शांतिपूर्ण संचालन हो सके।

कुल मिलाकर, प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बसंत पंचमी पर संगम स्नान से इंकार और मुख्यमंत्री के बयान पर नाराज़गी ने विवाद को बढ़ा दिया है। यह घटना दर्शाती है कि धार्मिक सम्मान, परंपरा और राजनीतिक बयानबाजी के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस विवाद पर नजर अभी भी पूरी तरह बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह सामाजिक और धार्मिक चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

written by :- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *