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वाईएसआर कांग्रेस पर किकबैक का साया:

आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल उस वक्त आ गया, जब राज्य की क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने शराब नीति घोटाले पर दायर अपनी चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे किए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी इस कथित घोटाले के ‘लाभार्थियों’ में शामिल हैं। यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच राज्य की शराब नीति से जुड़ा हुआ है, जिसमें शराब कंपनियों से ठेके, लेबल परमिट, आपूर्ति अधिकार और नकद किकबैक को लेकर भारी लेनदेन का आरोप है।

CID की चार्जशीट के अनुसार, करीब ₹3,500 करोड़ का काला धन इस पूरी अवधि में कथित रूप से इकट्ठा किया गया और उसे YSR कांग्रेस से जुड़े नेताओं, अधिकारियों और पार्टी के पदाधिकारियों के बीच बांटा गया। इन आरोपों में यह भी उल्लेख है कि शराब व्यापारियों से घूस के बदले में टैक्स छूट, सरकारी दबाव का इस्तेमाल और ठेके दिलवाने जैसी व्यवस्थाएं की गईं। सबसे बड़ी बात यह है कि भले ही चार्जशीट में जगन मोहन रेड्डी को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया हो, पर उनके नाम को सीधे-सीधे ‘लाभार्थी’ के रूप में दर्शाया गया है।

चार्जशीट में शामिल साक्ष्यों और गवाहों के हवाले से बताया गया है कि सरकारी फैसलों को प्रभावित करने के लिए दलालों की एक मजबूत चेन बनाई गई थी, जो सीधे YSRCP के सांसदों, मंत्रियों, अधिकारियों और सलाहकारों तक नकद धनराशि पहुंचाते थे। इन दलालों के ज़रिए शराब वितरकों और उद्योगपतियों से पैसा इकट्ठा किया जाता और फिर ‘नीतिगत समर्थन’ के बदले में उन्हें राहत दी जाती। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई बड़े औद्योगिक घरानों ने सरकार के पक्ष में फैसले लेने के लिए भारी रकम किकबैक के तौर पर दी।

चार्जशीट के अनुसार, इसमें एक मौजूदा मंत्री, तीन वरिष्ठ नौकरशाह और कई प्रभावशाली नेता सीधे तौर पर शामिल हैं। कुछ अधिकारियों ने शराब नीति को इस तरह डिजाइन किया कि विशेष कंपनियों को फायदा पहुंचे और इसके बदले में उन्होंने नकद रिश्वत ली। इस घोटाले की जड़ें केवल ठेकों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला, ब्रांड अनुमोदन, और दुकानों की संख्या तय करने जैसी प्रक्रियाओं में भी व्यापक हेराफेरी की गई।

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यह मामला अब विजयवाड़ा की एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित है। कोर्ट ने अभी तक चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान नहीं लिया है, लेकिन कानूनी और राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज ज़ोरों पर है। अगर कोर्ट इस पर संज्ञान लेती है और आगे की सुनवाई शुरू होती है, तो वाईएसआर कांग्रेस और खुद जगन मोहन रेड्डी के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है, विशेषकर राज्य में आगामी स्थानीय चुनावों के संदर्भ में।

इस पूरे घटनाक्रम ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले ही इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं और मांग कर रहे हैं कि जगन मोहन रेड्डी को इस मामले में आरोपी बनाया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि क्या कोर्ट की प्रक्रिया से इस हाई-प्रोफाइल स्कैम की परतें और खुलेंगी या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह जांच की भूल-भुलैया में उलझकर रह जाएगा।

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