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SDM निकिता शर्मा हटाई गईं, नए SDM नियुक्त !

मुजफ्फरनगर जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। सदर की उपजिलाधिकारी (SDM) निकिता शर्मा को उनके पद से हटा दिया गया है। यह फैसला जिले के डीएम उमेश मिश्रा ने लिया है, जो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को की गई कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की शिकायत के बाद सामने आया। निकिता शर्मा पर गंभीर आरोप लगे थे, जिनमें भ्रष्टाचार, अवैध प्लाटिंग को नजरअंदाज करना और जनप्रतिनिधियों से दुर्व्यवहार जैसे मामलों को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। यह मामला काफी समय से चर्चा में था, और अब प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पदमुक्त कर दिया है।

बताया जा रहा है कि तहसील स्तर पर अवैध प्लाटिंग और जमीन संबंधी लेन-देन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा था। कई शिकायतें आम जनता और स्थानीय नेताओं द्वारा की जा रही थीं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी। आरोपों के अनुसार, इन गतिविधियों में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत थी और इन्हें संरक्षण भी प्राप्त था। यही नहीं, स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें धमकाया जाता था और तहसील में कार्य करवाने के लिए रिश्वत देना आम बात हो गई थी। ऐसे माहौल में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव साफ नजर आ रहा था।

निकिता शर्मा पर यह भी आरोप है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ सही व्यवहार नहीं किया। कई बार विधायक और पार्षदों द्वारा उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। कहा जा रहा है कि उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिससे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। यह टकराव इतना बढ़ गया कि कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार को मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग करनी पड़ी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन ने तेज़ी से कदम उठाते हुए निकिता शर्मा को उनके पद से हटा दिया। उनके स्थान पर अब प्रवीण कुमार द्विवेदी को सदर का नया SDM नियुक्त किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि नई नियुक्ति से जिले में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा और प्रशासनिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी। प्रवीण कुमार को एक कड़क और अनुशासित अधिकारी माना जाता है, और उन्हें साफ-सुथरी छवि के लिए जाना जाता है।

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प्रशासनिक बदलाव के बाद आम जनता और स्थानीय नेताओं में राहत की भावना देखने को मिल रही है। कई लोगों ने उम्मीद जताई है कि अब तहसील में हो रहे गैरकानूनी कार्यों पर लगाम लगेगी और जनहित में फैसले लिए जाएंगे। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

यह घटनाक्रम प्रदेश भर के अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। योगी सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि भ्रष्टाचार और दुर्व्यवहार के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे में यह कार्रवाई न केवल एक उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि अन्य अधिकारियों को भी यह संदेश देती है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और आम जनता के प्रति संवेदनशीलता ही प्रशासन की प्राथमिकताएं होनी चाहिए।

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