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दुनिया का दंगल (International)

पुतिन आएंगे भारत! मोदी से मुलाकात में Su-57 डील पर बड़ा फैसला?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर भारत दौरे पर आने वाले हैं और इस यात्रा को भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पुतिन 11 सितंबर को भारत पहुंचेंगे और BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। खास बात यह है कि करीब 9 महीने के भीतर यह पुतिन की दूसरी भारत यात्रा होगी।

मोदी-पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग सबसे अहम मुद्दों में से एक हो सकता है। खास तौर पर रूस के Sukhoi-57 फाइटर जेट को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत पर सबकी नजरें रहेंगी। चर्चा है कि इस यात्रा के दौरान Su-57 से जुड़ी डील को लेकर कोई बड़ा फैसला हो सकता है और समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना भी जताई जा रही है।

अगर Su-57 डील आगे बढ़ती है, तो यह भारत की एयर पावर के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़ा यह सहयोग भारत और रूस के पुराने रक्षा संबंधों को नई दिशा दे सकता है। हालांकि, डील की अंतिम शर्तों और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

बैठक में सिर्फ लड़ाकू विमानों की बात नहीं होगी। दोनों नेता परमाणु ऊर्जा सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है और रूस इस क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच मौजूदा रक्षा परियोजनाओं, सैन्य तकनीक, उपकरणों और रणनीतिक सहयोग पर भी बातचीत हो सकती है। वैश्विक स्तर पर बदलते समीकरणों के बीच भारत के लिए रूस के साथ अपने पारंपरिक और रणनीतिक रिश्तों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस मुलाकात की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भारत और रूस के संबंध सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, परमाणु क्षेत्र, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे कई मोर्चों पर दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार बनी हुई है। ऐसे में मोदी-पुतिन की बैठक से आने वाले समय की कई नई प्राथमिकताओं के संकेत मिल सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल Sukhoi-57 को लेकर है। क्या पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस फाइटर जेट की डील पर मुहर लगेगी? अगर ऐसा होता है तो यह भारत-रूस रक्षा सहयोग में एक बड़ा कदम माना जाएगा। वहीं, परमाणु ऊर्जा और दूसरे रणनीतिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत भी दोनों देशों के रिश्तों की अगली दिशा तय कर सकती है।

यानी 11 सितंबर की मोदी-पुतिन मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से कई बड़े फैसलों का मंच बन सकती है। क्या इस बार Su-57 डील पर सच में लगेगी मुहर?

written by:- Anjali Mishra

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