Friday, September 11, 2026 27.3° Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

Government

अब चलेगी पाठशाला – सपा के साथ !

उत्तर प्रदेश में बंद हो चुके हजारों प्राइमरी स्कूलों को लेकर अब सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए एक नया कदम उठाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि जिन गांवों में स्कूल बंद हैं, वहां समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ‘पीडीए पाठशाला’ नाम से वैकल्पिक शिक्षा केंद्र चलाएंगे। अखिलेश यादव के मुताबिक यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में सामाजिक आंदोलन है।

राज्य के कई हिस्सों में हाल के वर्षों में स्कूलों की हालत बद से बदतर हो गई है। कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, तो कहीं बिल्डिंग ही जर्जर हालत में हैं। परिणामस्वरूप हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। सरकार ने इन बंद स्कूलों को लेकर ठोस योजना या पुनर्वास का कोई स्पष्ट खाका अब तक नहीं पेश किया है। ऐसे में समाजवादी पार्टी की यह पहल ग्रामीण शिक्षा की ओर ध्यान खींचने का एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।

‘पीडीए पाठशाला’ की शुरुआत न सिर्फ एक शिक्षा मुहिम है, बल्कि यह सपा के उस राजनीतिक एजेंडे का भी हिस्सा है, जिसमें पार्टी खुद को पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का रक्षक बताती है। पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक – यह नारा सपा की सामाजिक न्याय की नीति का नया रूप है। ऐसे में इन वर्गों के बच्चों को निशाना बनाकर शिक्षा मुहैया कराना पार्टी के रणनीतिक एजेंडे का विस्तार भी माना जा सकता है।

Also Read: चुनाव आयोग का नया आदेश: अब 45 दिन बाद डिलीट होंगे वीडियो, बढ़ी राजनीतिक हलचल

हालांकि सवाल यह भी उठता है कि क्या विपक्षी दल का यह कदम सिर्फ प्रतीकात्मक रहेगा, या यह वास्तव में शिक्षा के स्तर पर कोई ठोस बदलाव ला पाएगा? शिक्षकों की योग्यता, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता – ये सब ऐसे सवाल हैं जिनका सामना किसी भी वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली को करना पड़ता है। अगर सपा इन पाठशालाओं को सिर्फ कुछ गांवों तक सीमित रखती है, तो यह एक सीमित प्रयोग बनकर रह जाएगा। लेकिन अगर इसे गंभीरता और निरंतरता से आगे बढ़ाया गया, तो यह एक मिसाल बन सकता है।

कुल मिलाकर, सरकार की निष्क्रियता के बीच विपक्ष की यह पहल स्वागत योग्य है, बशर्ते इसमें स्थायित्व, पारदर्शिता और वास्तविक बदलाव का संकल्प हो। शिक्षा कोई सियासी चश्मे से देखने का मुद्दा नहीं, बल्कि यह समाज की रीढ़ होती है। अगर राजनीतिक दल वास्तव में बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देंगे, तो चाहे वे सत्ता में हों या विपक्ष में – देश को एक नई दिशा देने का मार्ग खुल सकता है।

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *