Friday, September 11, 2026 27.4° Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

Uncategorized

₹22,000 करोड़ के NCLT विवाद में नया मोड़! सुभाष चंद्रा बनाम अंबानी की जुबानी जंग तेज।

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी एंटरटेनमेंट के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले को लेकर विवाद अब कारोबारी लड़ाई से निकलकर मीडिया और कॉरपोरेट आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी NCLT में उनके खिलाफ करीब ₹22,006 करोड़ के दावों का मामला चर्चा में है। हालांकि, चंद्रा का कहना है कि इस रकम को उनकी व्यक्तिगत उधारी बताना गलत है और इससे उनके खिलाफ एक गलत नैरेटिव तैयार किया जा रहा है।

सुभाष चंद्रा ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर बैंकों या वित्तीय संस्थानों से ₹22,000 करोड़ का कर्ज नहीं लिया था। उनके मुताबिक यह आंकड़ा उन कंपनियों के कर्ज से जुड़े दावों का है, जिनके लिए उन्होंने पर्सनल गारंटी दी थी। चंद्रा ने यह भी दावा किया कि व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही में उनके खिलाफ वास्तविक संबंधित दावे करीब ₹3,992 करोड़ हैं, न कि ₹22,000 करोड़।

मामला इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि NCLT की ओर से मंजूर किए गए रिपेमेंट प्लान के तहत चंद्रा से करीब ₹6.5 करोड़ के भुगतान की बात सामने आई है, जबकि स्वीकार किए गए कुल दावों का आंकड़ा करीब ₹22,006 करोड़ बताया गया है। इस भारी अंतर ने कॉरपोरेट और कानूनी हलकों में भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ₹22,006 करोड़ का आंकड़ा सीधे-सीधे चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से उधार ली गई रकम नहीं माना जाना चाहिए।

चंद्रा ने इसी कवरेज को लेकर कुछ मीडिया संस्थानों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ गलत जानकारी और गलत नैरेटिव फैलाया जा रहा है और इसे उन्होंने ‘विच हंटिंग’ तक बताया। उन्होंने रिलायंस से जुड़े मीडिया नेटवर्क, खासकर TV18 और CNBC-TV18 की कवरेज पर सवाल उठाए और कहा कि इस मामले को इस तरह पेश किया जा रहा है, जिससे उनकी व्यक्तिगत छवि और कारोबारी विरासत पर असर पड़े।

इतना ही नहीं, चंद्रा ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर मुकेश अंबानी से सीधे संपर्क करने की कोशिश भी की। उन्होंने फोन करने और पत्र लिखने का जिक्र करते हुए अंबानी से कथित तौर पर गलत प्रचार रोकने की अपील की। चंद्रा ने दोनों कारोबारी परिवारों के पुराने संबंधों और अंबानी परिवार से अपने पुराने कारोबारी जुड़ाव का भी संदर्भ दिया। इससे यह विवाद और ज्यादा व्यक्तिगत और हाई-प्रोफाइल बन गया है।

दूसरी तरफ, रिलायंस ग्रुप ने सुभाष चंद्रा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिलायंस की ओर से कहा गया कि उसके मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए आरोप और संकेत ‘बेबुनियाद’ हैं। समूह ने यह भी कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया है। यानी चंद्रा के आरोपों के जवाब में रिलायंस ने साफ कर दिया है कि वह इन दावों को स्वीकार नहीं करता।

इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यह है कि ₹22,000 करोड़ का आंकड़ा और चंद्रा की व्यक्तिगत देनदारी दोनों को एक ही चीज मानना सही नहीं होगा। चंद्रा के अनुसार कंपनियों ने कर्ज लिया था और उन्होंने उनके लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। वहीं NCLT की कार्यवाही में अलग-अलग लेनदारों के दावे सामने आए। इसलिए इस मामले को समझने के लिए कंपनी का कर्ज, व्यक्तिगत गारंटी, लेनदारों के दावे और NCLT द्वारा मंजूर किए गए रिपेमेंट प्लान इन सभी को अलग-अलग देखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, ₹22,000 करोड़ का NCLT विवाद अब सुभाष चंद्रा बनाम रिलायंस की जुबानी जंग में बदलता दिखाई दे रहा है। एक तरफ चंद्रा इसे गलत नैरेटिव और कथित मीडिया अभियान बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ रिलायंस इन आरोपों को बेबुनियाद कहकर खारिज कर रहा है। अब असली नजर इस बात पर है कि NCLT से जुड़े वित्तीय दावों और रिपेमेंट प्लान का आगे क्या कानूनी असर होता है और क्या यह हाई-प्रोफाइल कॉरपोरेट विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।

written by:- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *