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धर्म और आस्था(Dharma-Karma)

कैलाश पर्वत: रहस्य और पवित्रता का प्रतीक

माउंट एवरेस्ट से ऊंचाई में कम होने के बावजूद कैलाश पर्वत आज तक किसी भी इंसान द्वारा फतह नहीं किया जा सका है। यह पर्वत तिब्बत में स्थित है और इसकी पवित्रता और रहस्य इसे दुनिया के सबसे रहस्यमय पर्वतों में शामिल करती है।

कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है। इसके अलावा, यह पर्वत बौद्ध, जैन और बॉन धर्मों में भी अत्यंत पवित्र है। चारों धर्मों में इसे श्रद्धा और पूजा का केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि यह पर्वत सिर्फ धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व रखता है।

कहा जाता है कि कैलाश पर्वत की चढ़ाई करना भगवान शिव की मर्यादा का उल्लंघन माना जाता है। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु और यात्री केवल पर्वत की परिक्रमा (कर्जा) करते हैं। यह परिक्रमा धार्मिक अनुष्ठान के रूप में की जाती है और इसे करने से आध्यात्मिक लाभ माना जाता है।

कैलाश पर्वत का मौसम बेहद कठोर और अप्रत्याशित है। यहां अचानक बर्फीले तूफान उठ जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। यही कारण है कि पर्वतारोहण यहां बेहद जोखिमपूर्ण और कठिन माना जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, कैलाश पर्वत के आसपास चुंबकीय शक्ति इतनी प्रबल है कि सामान्य कंपास और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी काम करना बंद कर देते हैं। इससे पर्वतारोहियों के लिए दिशा निर्धारण लगभग असंभव हो जाता है।

कुछ यात्रियों ने यहां अजीब ऊर्जा का अनुभव किया है और बताया है कि समय की गति बदलती हुई महसूस होती है। इस रहस्यमय अनुभव ने कैलाश पर्वत की पवित्रता और अनोखी शक्ति को और भी बढ़ा दिया है।

यही वजह है कि चीन सरकार ने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखी है। आज भी यह पर्वत न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि रहस्य, शक्ति और प्राकृतिक कठोरता का अद्वितीय मिश्रण भी प्रस्तुत करता है।

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