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सत्ता का संग्राम (Politics)

मोदी-पवार-शाह एक मंच पर… और कुछ घंटे पहले NCP(SP) सांसदों से PM की मुलाकात!

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। दिल्ली में सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के वेडिंग रिसेप्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक ही मंच पर नजर आए। यह समारोह निजी था और इसमें देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए, इसलिए सिर्फ एक तस्वीर के आधार पर किसी राजनीतिक समझौते का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन इस तस्वीर की अहमियत इसलिए बढ़ गई क्योंकि इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने एनसीपी (SP) के सांसदों से भी मुलाकात की थी।

दिलचस्प बात यह है कि एनसीपी (SP) सांसदों की प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों ने महाराष्ट्र से जुड़े कई मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे और कुछ प्रमुख सामाजिक सुधारकों को भारत रत्न देने की मांग भी की। वहीं, कुछ रिपोर्टों में इस बैठक को संभावित परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर चल रही चर्चाओं से भी जोड़ा गया है। हालांकि इन घटनाओं से किसी राजनीतिक सौदे या गठबंधन की पुष्टि नहीं होती।

यहीं से महाराष्ट्र की राजनीति में असली सवाल खड़ा होता है क्या यह केवल संयोग है कि एक ही दिन प्रधानमंत्री और NCP (SP) सांसदों की मुलाकात हुई और कुछ घंटे बाद मोदी, शरद पवार और अमित शाह एक ही समारोह में दिखाई दिए? या फिर इन घटनाओं के पीछे सिर्फ राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं ज्यादा संवाद चल रहा है? फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। खुद शरद पवार इससे पहले NCP के संभावित पुनर्मिलन को लेकर चल रही अटकलों को खारिज कर चुके हैं, इसलिए तस्वीरों और मुलाकातों को सीधे किसी नए गठबंधन के संकेत के तौर पर देखना सही नहीं होगा।

महाराष्ट्र के लिहाज से यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एनसीपी का विभाजन राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल चुका है। एक तरफ शरद पवार का NCP (SP) गुट विपक्षी खेमे में है, जबकि दूसरी तरफ अजित पवार का NCP सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में शरद पवार परिवार के अलग-अलग राजनीतिक धड़ों के बीच रिश्ते और उनकी भविष्य की रणनीति पर लगातार नजर रहती है। यही वजह है कि जब प्रधानमंत्री और शरद पवार एक ही फ्रेम में नजर आते हैं, तो राजनीतिक गलियारों में संभावनाओं पर चर्चा होना स्वाभाविक है।

इसके अलावा अमित शाह की मौजूदगी तस्वीर को और ज्यादा राजनीतिक बना देती है। शाह और पवार के बीच पहले भी राजनीतिक स्तर पर मुलाकातें और चर्चाएं सुर्खियों में रही हैं। हाल में अमित शाह और सुप्रिया सुले की मुलाकात को लेकर भी महाराष्ट्र में संभावित राजनीतिक समीकरणों पर अटकलें चली थीं। हालांकि ऐसी मुलाकातों को अपने आप में गठबंधन की घोषणा मानना उचित नहीं होगा।

दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री मोदी की NCP (SP) सांसदों से बैठक ने विपक्षी राजनीति के भीतर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं में असहजता की चर्चा सामने आई है, क्योंकि NCP (SP) विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में अगर सरकार को संसद में किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर विपक्षी दलों के सांसदों का समर्थन या सहयोग चाहिए, तो इस तरह की बातचीत राजनीतिक रूप से अहम हो सकती है। लेकिन यह भी साफ है कि अभी तक किसी समर्थन, समझौते या गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में पुराने समीकरणों के बीच कोई नया संवाद शुरू हो रहा है? क्या शरद पवार और बीजेपी नेतृत्व के बीच केवल व्यक्तिगत और संसदीय संवाद है, या फिर आने वाले समय में इसका असर चुनावी राजनीति पर भी दिखाई देगा? फिलहाल इन सवालों का जवाब भविष्य के घटनाक्रम में छिपा है। एक पारिवारिक समारोह की तस्वीर को राजनीतिक डील का सबूत मानना सही नहीं होगा, लेकिन उसी दिन हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकातें निश्चित तौर पर राजनीतिक विश्लेषण के लिए पर्याप्त सामग्री दे रही हैं।

आने वाले दिनों में असली तस्वीर तब साफ होगी जब NCP (SP), बीजेपी और कांग्रेस अपने अगले राजनीतिक कदम सामने रखेंगे। अगर संसद में किसी बड़े मुद्दे पर NCP (SP) का रुख सरकार के करीब दिखाई देता है या महाराष्ट्र में दोनों खेमों के नेताओं के बीच संवाद बढ़ता है, तो आज की इन मुलाकातों को नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल मोदी-पवार-शाह की तस्वीर और उससे कुछ घंटे पहले हुई NCP (SP) सांसदों की PM से मुलाकात ने महाराष्ट्र की सियासत में सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं लेकिन जवाब अभी बाकी है।

written by:- Anjali Mishra

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