मायावती का अखिलेश पर बड़ा हमला, PDA की परिभाषा पर उठाए सवाल !
लखनऊ में बसपा अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। मायावती ने सपा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने पुराने सहयोगी दलों और नेताओं को उचित सम्मान नहीं देती। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बसपा और सपा के बीच जुबानी जंग तेज होने की संभावना बढ़ गई है।
मायावती ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की राजनीति पर संकीर्ण सोच और जातिवादी मानसिकता हावी है। उन्होंने कहा कि सपा की कार्यशैली और राजनीतिक फैसलों का असर केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव समाज के अलग-अलग वर्गों पर भी पड़ता है। मायावती ने लोगों से ऐसी राजनीति को समझने और सावधान रहने की अपील की।
बसपा प्रमुख ने अखिलेश यादव के चर्चित PDA फॉर्मूले को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि PDA में शामिल ‘P’ की व्याख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग बातें सामने आती रही हैं। मायावती के मुताबिक, कभी इसे पिछड़ा वर्ग बताया जाता है तो कभी पंडित से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बदलती व्याख्याएं राजनीतिक फायदे और वोटों के समीकरण को ध्यान में रखकर की जा रही हैं।
मायावती ने कहा कि राजनीतिक दलों को समाज के किसी एक वर्ग या जाति के आधार पर राजनीति करने के बजाय सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति आधारित राजनीति समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर सकती है। बसपा प्रमुख ने इसे सर्वसमाज के लिए नुकसानदायक बताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
उन्होंने सपा के पुराने सहयोगियों और नेताओं के साथ व्यवहार को भी मुद्दा बनाया। मायावती का आरोप है कि समाजवादी पार्टी राजनीतिक जरूरतों के हिसाब से सहयोगियों के साथ संबंध बनाती और बदलती रही है। हालांकि, उनके इस बयान से साफ है कि बसपा अब सपा की रणनीति, संगठन और उसके सामाजिक समीकरणों को खुलकर निशाना बनाने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA का मुद्दा पहले से ही चर्चा का विषय रहा है। अखिलेश यादव इसे पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लेकर चलने वाली राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश करते रहे हैं। वहीं मायावती ने इसी फॉर्मूले पर सवाल उठाकर सपा की राजनीति और उसके सामाजिक समीकरणों पर सीधा हमला बोला है।
कुल मिलाकर, मायावती के इस बयान ने यूपी की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सपा PDA के जरिए अपने राजनीतिक और सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बसपा इसे लेकर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले समय में दोनों दलों के बीच यह राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं।
written by:- Anjali Mishra
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