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सत्ता का संग्राम (Politics)

टीएमसी में बड़ा फेरबदल: बागी सुर, नए चेहरे और अंदरूनी सत्ता संघर्ष की नई कहानी !

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा उथल-पुथल देखने को मिला है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर संगठनात्मक स्तर पर कई अहम बदलाव किए गए हैं। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर हुई वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला कि पार्टी अब अंदरूनी असंतोष और कथित बगावत को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है। इस बैठक के बाद कई नेताओं के पदों में बदलाव और कुछ को संगठन से हटाए जाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

सूत्रों और पार्टी नेताओं के अनुसार, इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कुछ वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे और असंतोष के बाद खाली हुए पदों को नए चेहरों से भरा जाएगा। बताया गया कि सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे संगठन में दो अहम स्थान रिक्त हो गए। इस बदलाव ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा और गुटबाजी की स्थिति धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है।

इसी बैठक में यह भी दावा किया गया कि कुछ नेता, जिनमें सुदीप बंद्योपाध्याय, माला रॉय और कुछ अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं, पार्टी के एक हिस्से से दूरी बना चुके हैं या अलग गुट की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। इसी वजह से उन्हें वर्किंग कमेटी से हटाने का फैसला लिया गया। यह कदम पार्टी नेतृत्व की ओर से अनुशासन बनाए रखने और संगठन को एकजुट रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, पार्टी ने कुछ नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश की है। वरिष्ठ नेता सौगत रॉय और ज्योतिप्रिय मल्लिक को वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जो नेता संगठन के प्रति वफादार हैं, उन्हें आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलेगा।

संगठनात्मक स्तर पर एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिला कि कोलकाता उत्तर के अध्यक्ष पद पर अब कुणाल घोष को नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ मजबूत रखना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम है, खासकर आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से।

इसके अलावा, युवा मोर्चे में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जहां अभिनेत्री से नेता बनी सायनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह नए नेतृत्व को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी युवा इकाई में भी नई ऊर्जा और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।

इन बदलावों के बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कुछ सांसदों का एक समूह पार्टी लाइन से अलग होकर अपनी रणनीति बना रहा है। बताया जा रहा है कि ये बागी सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर से मुलाकात भी कर सकते हैं, जिससे मामला सिर्फ पार्टी के भीतर का न रहकर संसद तक पहुंच सकता है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया इसे “संगठनात्मक पुनर्गठन” बता रही है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह पूरा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही शक्ति संतुलन की लड़ाई और नेतृत्व के नियंत्रण को मजबूत करने की कोशिशों को दर्शाता है। एक तरफ जहां नए चेहरों को आगे लाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ असंतोष जताने वाले नेताओं पर सख्ती भी दिखाई जा रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह फेरबदल पार्टी को मजबूत करेगा या फिर अंदरूनी तनाव को और बढ़ा देगा।

written by:- Anjali Mishra

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