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झांसी में अमानवीय घटना — स्कूटी से बांधकर कुत्ते को घसीटा !

उत्तर प्रदेश के झांसी से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक व्यक्ति स्कूटी चलाते हुए अपने पीछे एक कुत्ते को रस्सी से बांधकर घसीटता हुआ ले जाता दिखा। यह दृश्य न सिर्फ देखने वालों के लिए दर्दनाक था, बल्कि इसे देखकर हर संवेदनशील इंसान का दिल दहल उठा। सड़कों पर घसीटे जा रहे उस मासूम जानवर की पीड़ा स्पष्ट रूप से देखी जा सकती थी, और आसपास मौजूद लोग हैरान रह गए कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है।

यह घटना तब सामने आई जब कुछ राहगीरों ने आरोपी को ऐसा करते देखा और उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि कुत्ता स्कूटी के पीछे बेतरतीब तरीके से घिसट रहा है और वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। राहगीरों ने तुरंत उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने रुकने से पहले ही अपनी सफाई पेश करनी शुरू कर दी। उसने दावा किया कि यह कुत्ता मोहल्ले में बच्चों को काट रहा था, इसलिए वह इसे ऐसे ले जा रहा था।

आरोपी की यह सफाई सुनने के बाद भी वहां मौजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। कई लोगों ने उसे जमकर फटकार लगाई और बताया कि किसी जानवर के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार करना कानून के खिलाफ है। भारत में पशु क्रूरता को रोकने के लिए ‘प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट’ जैसे कानून लागू हैं, और ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है।

वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड होते ही तेजी से वायरल हो गया। हजारों लोगों ने इसे शेयर किया और आरोपी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। कई यूजर्स ने लिखा कि चाहे कुत्ते ने किसी को काटा हो या नहीं, उसकी जान लेने या उसे यातना देने का हक किसी को नहीं है। लोग इस बात से भी नाराज थे कि घटना के समय वहां मौजूद लोग केवल वीडियो बनाने में लगे रहे, जबकि तत्काल कुत्ते को बचाने के लिए और भी सख्त कदम उठाए जा सकते थे।

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इस घटना ने एक बार फिर भारत में पशु अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और उनके अधिकारों को लेकर समाज में जागरूकता अभी भी सीमित है। ऐसे मामलों से साफ है कि कानून होने के बावजूद क्रूरता के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा दोनों की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

वहीं, स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर भी दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई करें। पशु अधिकार संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ा विरोध जताया है और आरोपी पर मुकदमा दर्ज कर कठोर सजा देने की मांग की है। झांसी की यह घटना केवल एक कुत्ते की पीड़ा की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारी समाजिक संवेदनाओं की परीक्षा भी है—और इस बार, हम सभी इस परीक्षा में बुरी तरह नाकाम हुए हैं।

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