GDP 7.8% पर घमासान! राजन के सवाल पर गोयल का पलटवार, अब रोजगार पर बड़ी बहस |
भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी की तेज GDP ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन इसी शानदार आंकड़े के बीच रोजगार को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सवाल उठाया है कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छी और टिकाऊ नौकरियां क्यों नहीं बन रही हैं। उनके सवालों ने GDP की गुणवत्ता और ग्रोथ के वास्तविक असर को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजन ने खास तौर पर निवेश और FDI की रफ्तार को लेकर चिंता जताई है। उनका सवाल है कि अगर कंपनियां और उद्योगपति भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वस्त हैं, तो निजी निवेश में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही? उन्होंने GDP के आंकड़ों में कुछ विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि आंकड़ों को लेकर सवाल उठाना जरूरी है, खासकर तब जब इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा किया जा रहा हो।
राजन की चिंता सिर्फ मौजूदा रोजगार तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि भारत इस समय ‘पॉपुलेशन डिविडेंड’ के दौर में है, यानी देश के पास बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र की युवा आबादी है। यह आबादी आर्थिक विकास का सबसे बड़ा इंजन बन सकती है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त और उत्पादक रोजगार पैदा करना जरूरी है। अगर युवा आबादी को सही अवसर नहीं मिले, तो यही जनसांख्यिकीय लाभ आगे चलकर चुनौती में बदल सकता है।
इस बहस में Infosys के पूर्व CFO मोहनदास पई ने भी अपनी अलग राय रखी है। उन्होंने रोजगार के वास्तविक आंकड़ों को बेहतर तरीके से समझने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से EPFO के मासिक रोजगार आंकड़े फिर से जारी करने की मांग की है। यानी बहस अब सिर्फ GDP की दर पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि आर्थिक ग्रोथ का असर रोजगार के मोर्चे पर कितना दिखाई दे रहा है।
इसी बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राजन के सवालों पर तीखा पलटवार किया है। गोयल ने राजन का नाम लिए बिना कहा कि GDP की आलोचना करने वाले लोग ही देश में बेरोजगार हैं और आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी तंज कसा कि कुछ पूर्व RBI गवर्नरों को आंकड़ों की तुलना करना तक नहीं आता।
गोयल ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास अब टीवी पैनल पर जाकर तर्क गढ़ने के अलावा कोई काम नहीं बचा है। उनका कहना है कि सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता और नकारात्मक सोच रखने वाले लोग खुद को ही छोटा कर रहे हैं। यानी सरकार की तरफ से संदेश साफ है कि 7.8 फीसदी की GDP ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है।
दरअसल, सरकार के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP 7.8 फीसदी बढ़ी, जबकि RBI का अनुमान 7 फीसदी था। यानी वास्तविक ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रही। लेकिन यहीं से बहस का दूसरा पहलू सामने आता है क्या तेज GDP ग्रोथ अपने आप पर्याप्त रोजगार में बदल रही है? क्योंकि किसी भी अर्थव्यवस्था की सफलता सिर्फ उत्पादन और विकास दर से नहीं, बल्कि लोगों की आय, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार से भी मापी जाती है।
यही वजह है कि अब भारत की 7.8 फीसदी ग्रोथ पर राजन और सरकार के बीच बहस सिर्फ आंकड़ों की लड़ाई नहीं रह गई है। एक तरफ सरकार तेज विकास दर को अर्थव्यवस्था की ताकत बता रही है, तो दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है कि इस विकास का फायदा युवाओं तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है। आखिर GDP 7.8% बढ़ रही है, तो क्या उसी रफ्तार से भारत में अच्छी नौकरियां भी बढ़ रही हैं?
written by:- Anjali Mishra
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