होर्मुज पर फिर मचा घमासान! अमेरिका का हमला, ईरान का मिसाइल-ड्रोन जवाब |
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान के दक्षिणी हिस्से में अमेरिका की ओर से नए सैन्य हमलों की खबर सामने आई है। बताया गया है कि इन हमलों में रडार सिस्टम, एयर डिफेंस और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तनाव दोनों बढ़ गए हैं।
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया। ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की बात सामने आई है। यानी दोनों देशों के बीच टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे सैन्य कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई तक पहुंच गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे अहम रणनीतिक केंद्र बनकर सामने आया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता।
अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है या समुद्री सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी से लेकर शिपिंग लागत और सप्लाई चेन तक इसका असर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस इलाके में होने वाली हर सैन्य गतिविधि पर टिकी हुई है।
अमेरिका की ओर से ईरान के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाए जाने का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना माना जा सकता है। दूसरी तरफ, ईरान का मिसाइल-ड्रोन जवाब यह संकेत देता है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने पीछे हटने के बजाय जवाबी कार्रवाई की क्षमता दिखाना चाहता है।
इस टकराव में अमेरिका के सहयोगी देश भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। अगर ईरान की ओर से अमेरिकी सहयोगी देशों के ठिकानों को लगातार निशाना बनाया जाता है, तो संघर्ष का दायरा और बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में मध्य-पूर्व के कई हिस्से सीधे इस सैन्य तनाव की चपेट में आ सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहेगा या फिर एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जाएगा। क्योंकि होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग के आसपास बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सैन्य दबाव बढ़ता दिख रहा है। एक तरफ अमेरिकी हमले, दूसरी तरफ ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले—इस टकराव ने मध्य-पूर्व की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब सवाल यही है क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का तनाव एक बड़े युद्ध की शुरुआत बन सकता है?
written by:- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
