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बाल विवाह के खिलाफ जंग,शिवानी की कहानी !

बाल विवाह ये एक अभिशाप है और इस अभिशाप की खिलाफ उतरी है बलरामपुर के एक गांव की बेटी। तुलसीपुर ब्लॉक के ग्राम जुगलीकलां की बेटी शिवानी अब तक कई लड़कियों को बाल विवाह के अभिशाप से बचा चुकी है। आज जिस कुरीति के खिलाफ शिवानी की आवाज़ पहचानी जाती है, दरअसल उसको ये जंग खुद को बाल विवाह से बचाने से शुरू हुई थी। शिवानी बताती है कि साल 2023 की बात है, उसके पिता का निधन हो गया था। आस-पड़ोस और गांववाले तो यही जताने में लग गए थे कि बिन बाप की बेटी बोझ की तरह होती है। मां को समझा भी रहे थे कि जल्द से जल्द बेटी की शादी कर विदा करो और बोझ से मुक्ति पाओ।

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मां को भी कच्ची उम्र में बेटी की शादी में भलाई नज़र आने लगी थी। शिवानी को जब पता चला कि उसकी सगाई की तैयारी हो गयी है तो उसके पांव तले जमीन खिसक गयी। उसको लगा कि उसके सपने मिट्टी में मिल गए। वह तब हाईस्कूल बोर्ड की तैयारी कर रही थी। उसने ठाना कि वह अभी किसी भी दशा में शादी नहीं करेगी। बस उसने घर में ही सत्याग्रह शुरू कर दिया। अन्न-जल त्याग दिया। बिटिया के विरोध पर मां पसीजी।

बिटिया ने भी भरोसा दिया कि वह घर के लिए बेटे से ज्यादा करके दिखाएगी। अंततः बेटी की जीत हुई और शादी टल गयी। शिवानी को आगे पढ़ने का पूरा अवसर दिया गया। अब शिवानी इलाके में बाल विवाह के खिलाफ एक रोल मॉडल है। अपनी शादी तो उसने रोकी ही, अब तक कई बेटियों को बाल विवाह से बचा चुकी है। बाल विवाह के खिलाफ उसके अभियान पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल उसे सम्मानित कर चुकी हैं। लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर इसी साल महिला कल्याण विभाग ने भी शिवानी को सम्मानित किया।

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