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Administrationअपराध की गूंज (Crime)

कानपुर में दरोगा की रंगदारी… व्यापारी से मांगी 5 लाख फिरौती !

कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में तैनात दरोगा प्रभाष शर्मा पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं, जिसने पूरे पुलिस विभाग और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। व्यापारी राम बहादुर की पत्नी ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि उनके पति को दरोगा ने कथित रूप से अगवा कर लिया और 5 लाख रुपये की फिरौती की मांग की। पीड़िता के अनुसार, उसे धमकी दी गई कि यदि रकम नहीं दी गई, तो उसके पति को एमपी (मध्य प्रदेश) ले जाकर एनकाउंटर कर दिया जाएगा। यह आरोप न केवल बेहद गंभीर है, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

व्यापारी की पत्नी ने बताया कि उसने पति की जान बचाने के लिए अपने गहने और उधारी के जरिए किसी तरह 3 लाख रुपये इकट्ठे कर दरोगा को दिए, जिसके बाद उसके पति को छोड़ा गया। यह रकम एक सुनसान जगह पर दी गई, जहां कोई औपचारिक रसीद या दस्तावेज नहीं लिया गया। महिला का आरोप है कि उसके पति को कुछ घंटों तक एक निजी स्थान पर रखा गया, जहां न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि धमकी दी गई कि पुलिस रिकॉर्ड में उसे अपराधी दिखाकर मुठभेड़ में मार दिया जाएगा। यह पूरी घटना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि पुलिस वर्दी की आड़ में एक संगठित जबरन वसूली का उदाहरण भी बन गई है।

घटना के सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारिक समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया है। व्यापारी संगठनों ने कानपुर के पुलिस अधीक्षक और डीआईजी से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है, जहाँ लोग “दरोगा गुंडा है” जैसे नारों के साथ पुलिस के खिलाफ़ नाराज़गी जता रहे हैं। कानपुर पुलिस की साख इस घटना से बुरी तरह प्रभावित हुई है, क्योंकि यह कोई साधारण पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि एक कार्यरत दरोगा के खिलाफ सीधे आपराधिक कृत्य का मामला है

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पुलिस विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार आरोपी दरोगा को लाइनहाजिर कर दिया गया है और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि पीड़ित परिवार और समाज के लोगों की मांग है कि यह केवल विभागीय मामला नहीं, बल्कि आपराधिक श्रेणी में आता है और इसके तहत FIR दर्ज कर गिरफ्तारी होनी चाहिए। एनकाउंटर की धमकी देना, व्यक्ति को बंधक बनाना, और फिरौती लेना भारतीय दंड संहिता के तहत संगीन अपराध हैं और इनकी जांच स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए। इस घटना ने पुलिस में चल रहे “अंधाधुंध अधिकार” और “गैरजवाबदेही” के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

अब सबकी नजरें प्रदेश सरकार और कानपुर पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या वर्दीधारी दरोगा पर भी उतनी ही सख्ती से कार्रवाई होगी जितनी किसी आम अपराधी पर होती है? क्या पीड़ित व्यापारी और उसका परिवार सुरक्षित महसूस कर पाएगा? यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस सुधारों, जवाबदेही और आम जनता के साथ न्याय की कसौटी पर एक गंभीर परीक्षा बन चुकी है। यदि समय रहते इस पर निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशभर में पुलिस के प्रति जनता का विश्वास डगमगा सकता है।

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