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सत्ता का संग्राम (Politics)

बंगाल चुनाव में बदलते समीकरण: कांग्रेस हाशिये पर, TMC मजबूत, ED की एंट्री से बढ़ी हलचल !

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस बार काफी दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस खुद को पहले से ज्यादा अकेला महसूस कर रही है। जो सहयोगी दल कभी उसके साथ खड़े थे, वही अब INDIA गठबंधन के भीतर रहते हुए भी तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करते नजर आ रहे हैं।

बंगाल में कभी मजबूत पकड़ रखने वाली कांग्रेस अब हाशिये पर पहुंच चुकी है। 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और सिर्फ एक सांसद ही जीत सका। ऐसे में यह चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा बन गया है।

दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जिसमें 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इन सीटों पर मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ज्यादातर जगहों पर तृणमूल कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिख रही है।

इसी चरण में कोलकाता पोर्ट सीट भी शामिल है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और फिरहाद हकीम चुनावी मैदान में हैं। यह सीट हाई-प्रोफाइल मानी जा रही है और यहां का मुकाबला काफी चर्चा में है।

फिरहाद हकीम के चुनावी हलफनामे ने भी सुर्खियां बटोरी हैं। इसमें बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों में उनकी संपत्ति में करीब 69% की वृद्धि हुई है, जिससे विपक्ष को हमला करने का मुद्दा मिल गया है और चुनावी बहस तेज हो गई है।

पहले चरण के मतदान ने इस बार नया रिकॉर्ड बना दिया है। भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मतदान प्रतिशत ने पुराने सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। कुछ जगहों पर मामूली झड़पों की खबरें आईं, लेकिन कुल मिलाकर माहौल शांतिपूर्ण रहा।

खास बात यह रही कि इस बार किसी भी प्रमुख पार्टी ने बड़े पैमाने पर धांधली या बूथ कैप्चरिंग जैसे गंभीर आरोप नहीं लगाए। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूती मिली है।

इससे पहले सबसे ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड 2011 में 84.72% था, लेकिन इस बार मतदाताओं के उत्साह ने उस आंकड़े को भी पार कर लिया। यह दिखाता है कि जनता इस बार बदलाव और भागीदारी के लिए ज्यादा सक्रिय है।

दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। कोलकाता, बर्धवान और हाबरा समेत 9 ठिकानों पर छापेमारी की गई है, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया है।

यह कार्रवाई कथित पीडीएस घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें निरंजन चंद्र साहा समेत कई लोग जांच के दायरे में हैं। मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत दर्ज मामले में ईडी की यह कार्रवाई आने वाले चुनावी चरणों पर भी असर डाल सकती है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक अस्तित्व, संगठनात्मक ताकत और एजेंसियों की सक्रियता के बीच एक बहुस्तरीय मुकाबला बन चुका है।

written by :- Anjali Mishra

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