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फूट-फूटकर रोईं BJP की रिंकल सिंह !

अम्बेडकरनगर में भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रिंकल सिंह का दर्द उस वक्त पूरे मंच पर छलक पड़ा जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से रोते हुए अपनी ही पार्टी की सरकार में न्याय न मिलने की बात कही। यह भावुक दृश्य एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला, जहां राज्यसभा सांसद बृजलाल समेत कई बड़े नेता मंच पर मौजूद थे। रिंकल सिंह ने आरोप लगाया कि जैतूपुर गांव में कुछ लोगों ने उन पर जानलेवा हमला किया, लेकिन इसके बावजूद महरुआ थाने की पुलिस और क्षेत्राधिकारी (सीओ) भीटी ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने थाने जाकर शिकायत दर्ज करानी चाही, तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया और बार-बार अपमानित किया गया।

मंच पर बोलते समय जब रिंकल सिंह के सब्र का बांध टूट गया, तो उन्होंने सांसद बृजलाल के पैर पकड़कर उनसे न्याय की गुहार लगाई। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं, लेकिन रिंकल सिंह की पीड़ा बताती है कि सत्ता में होने के बावजूद एक महिला नेता को अपने ही शासन में न्याय के लिए इस कदर संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस न केवल उदासीन है, बल्कि दबाव में आकर उनकी शिकायतों को दबा रही है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि जब एक जिम्मेदार पद पर बैठी महिला के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम महिलाओं की स्थिति क्या होगी ?

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यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और कई लोग इसे बीजेपी की महिला सशक्तिकरण की नीतियों पर सीधा प्रहार मान रहे हैं। मंच पर फूट-फूटकर रोती रिंकल सिंह की तस्वीरें और वीडियो लोगों में सहानुभूति तो जगा रहे हैं, लेकिन सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। बीजेपी अक्सर अपने मंचों से महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन इस घटना ने दिखा दिया कि ज़मीनी स्तर पर हालात कुछ और ही हैं। महिला नेता को इस कदर बेबस होते देख पार्टी के अंदर भी फूट की चर्चाएं तेज़ हो गई हैं।

अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है। क्या रिंकल सिंह को न्याय मिलेगा? क्या दोषी पुलिस अधिकारियों पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? और सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह मामला पार्टी को अंदर से झकझोर पाएगा या फिर यह भी बाकी मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल तो यह घटना सत्ताधारी दल के उस चेहरे को उजागर कर रही है, जिसे वह जनता के सामने छिपाने की कोशिश करता है—एक ऐसा चेहरा जिसमें सत्ता तो है, लेकिन न्याय की पहुंच बेहद दूर है।

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