सोनिया गांधी की ‘Belonging’ पर नया मोड़! पेंगुइन ने कहा- हम भारत में प्रकाशक नहीं !
सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने साफ कहा है कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है। यह बयान उन चर्चाओं के बीच आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि पेंगुइन ने किताब के भारतीय प्रकाशन से पीछे हटने का फैसला किया है।
किताब को लेकर विवाद तब तेज हुआ जब ऐसी खबरें सामने आईं कि भारत में इसके प्रकाशन को लेकर प्रकाशक और लेखिका के बीच कुछ संपादकीय मुद्दों पर असहमति हुई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि प्रकाशक की ओर से कुछ बदलावों या संपादन का सुझाव दिया गया था, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया। हालांकि, पेंगुइन के ताजा स्पष्टीकरण ने पूरे मामले की तस्वीर को और जटिल बना दिया है।
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि किताब के कुछ हिस्सों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और चीन से जुड़े संदर्भों को हटाने या बदलने का दबाव था। दूसरी ओर, प्रकाशन पक्ष ने इसे सामान्य संपादकीय और प्रकाशन प्रक्रिया से जोड़कर देखा है। इसलिए फिलहाल विवाद का एक बड़ा हिस्सा इन दावों और उनके जवाबों के बीच घूम रहा है।
अब पेंगुइन का यह कहना कि वह भारत में ‘Belonging’ की प्रकाशक नहीं है, मामले को एक नया मोड़ देता है। यानी किताब के भारतीय संस्करण की प्रकाशन व्यवस्था को लेकर जो धारणाएं बन रही थीं, उन पर कंपनी ने खुद को स्पष्ट रूप से अलग कर लिया है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत में इस किताब का प्रकाशन कौन करेगा और किस रूप में करेगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, पेंगुइन के भारतीय प्रकाशन से अलग होने के बाद अन्य प्रकाशक भी किताब के भारतीय अधिकारों में रुचि दिखा रहे हैं। HarperCollins का नाम भी संभावित भारतीय प्रकाशक के तौर पर सामने आया है। वहीं किताब के अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन की योजना अमेरिकी प्रकाशक Alfred A. Knopf से जुड़ी बताई जा रही है।
‘Belonging’ इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सोनिया गांधी के जीवन, परिवार और भारतीय राजनीति से जुड़े अनुभवों पर आधारित संस्मरण है। ऐसे में किताब में शामिल राजनीतिक और व्यक्तिगत घटनाओं को लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। भारतीय संस्करण के प्रकाशक को लेकर पैदा हुआ विवाद इस उत्सुकता को और बढ़ा रहा है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पेंगुइन ने भारत में किताब प्रकाशित करने से खुद को अलग बताते हुए अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। वहीं किताब के संपादन, प्रकाशन अधिकार और संभावित नए भारतीय प्रकाशक को लेकर कई सवाल अभी चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में यदि नया प्रकाशक सामने आता है या किताब के भारतीय संस्करण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा होती है, तो इस पूरे विवाद की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
कुल मिलाकर, सोनिया गांधी की ‘Belonging’ अब सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि प्रकाशन, संपादकीय स्वतंत्रता और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। पेंगुइन के ताजा बयान ने ‘किताब क्यों नहीं छपी?’ वाले सवाल को बदलकर अब यह सवाल खड़ा कर दिया है भारत में ‘Belonging’ आखिर कौन प्रकाशित करेगा और क्या विवादित माने जा रहे हिस्से उसी रूप में किताब में मौजूद रहेंगे?
written by:- Anjali Mishra
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