चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे?एथनॉल,मौसम और घटता गन्ना बना वजह !
देश में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें एक साथ काम करती दिखाई दे रही हैं। एक तरफ चीनी की उपलब्धता और उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ त्योहारों का सीजन शुरू होने से मांग में इजाफे की उम्मीद है। ऐसे में बाजार में कम सप्लाई और बढ़ती मांग का दबाव कीमतों को ऊपर ले जा रहा है। हालांकि, चीनी की महंगाई के पीछे सबसे बड़ी वजह क्या है, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
इस पूरे मामले में एथनॉल नीति सबसे ज्यादा चर्चा में है। गन्ने से एथनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल बढ़ने के कारण कुछ लोगों का मानना है कि चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा प्रभावित हो रही है। जब गन्ने का ज्यादा हिस्सा एथनॉल उत्पादन की ओर जाता है, तो चीनी मिलों के पास चीनी बनाने के लिए कम कच्चा माल बचने की आशंका जताई जाती है। यही वजह है कि एथनॉल नीति को चीनी की कीमतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, सरकार का पक्ष इससे अलग है। सरकार का कहना है कि मौजूदा चीनी महंगाई की मुख्य वजह एथनॉल नहीं है। इसके पीछे गन्ने की पैदावार में कमी और खराब मौसम को ज्यादा जिम्मेदार माना जा रहा है। यानी सरकार के मुताबिक समस्या का बड़ा कारण उत्पादन पक्ष में आई कमजोरी है, न कि केवल गन्ने का एथनॉल उत्पादन की ओर डायवर्जन।
मौसम भी चीनी की कीमतों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अल नीनो और कमजोर मानसून को लेकर चिंता है, क्योंकि कम बारिश का सीधा असर गन्ने की बुवाई और फसल पर पड़ सकता है। गन्ने को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है और अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। इसका असर सिर्फ मौजूदा सीजन पर नहीं, बल्कि आने वाली फसल और भविष्य की चीनी सप्लाई पर भी पड़ सकता है।
गन्ने के रकबे में कमी भी बाजार के लिए चिंता का विषय है। अगर खेती के लिए इस्तेमाल होने वाला क्षेत्र घटता है, तो आगे चलकर गन्ने का कुल उत्पादन कम हो सकता है। इसका मतलब यह है कि चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल मिलने में परेशानी हो सकती है और घरेलू बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि बाजार आने वाले महीनों की सप्लाई को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
दूसरी तरफ त्योहारों का मौसम भी दस्तक दे चुका है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और दूसरे खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में अगर मांग अचानक बढ़ती है और उसके मुकाबले बाजार में सप्लाई सीमित रहती है, तो कीमतों पर स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ सकता है। यानी आने वाले समय में मांग बढ़ने की संभावना भी चीनी बाजार के लिए अहम फैक्टर है।
कुल मिलाकर, चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना आसान नहीं है। एथनॉल नीति को लेकर बहस अपनी जगह है, लेकिन सरकार गन्ने की कम पैदावार और खराब मौसम को मुख्य वजह बता रही है। इसके साथ घटता गन्ना रकबा, कमजोर मानसून और त्योहारों से बढ़ने वाली मांग ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अगर सप्लाई कमजोर रही और मांग बढ़ती गई, तो चीनी की कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।
written by:- Anjali Mishra
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