त्योहारों से पहले मथुरा में 2 हजार लीटर मिलावटी दूध और 500 किलो पनीर बरामद !
त्योहारों का मौसम शुरू होते ही मिठाइयों और दूध से बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ जाती है, लेकिन इसी बढ़ती मांग के बीच मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। मथुरा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने ऐसे ही लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की है। कार्रवाई के दौरान करीब 2 हजार लीटर मिलावटी दूध और 500 किलो पनीर बरामद किया गया। अधिकारियों के मुताबिक बरामद किए गए दोनों खाद्य पदार्थों को जांच के बाद नष्ट कर दिया गया, ताकि इन्हें बाजार में पहुंचाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न किया जा सके।
बताया जा रहा है कि बरामद किए गए मिलावटी खाद्य पदार्थों की कीमत करीब 2.50 लाख रुपये आंकी गई है। त्योहारों से ठीक पहले इतनी बड़ी मात्रा में मिलावटी दूध और पनीर मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई चर्चा में आ गई है। खासकर इसलिए क्योंकि त्योहारों के दौरान दूध, खोया, पनीर और इनसे बनने वाली मिठाइयों की खपत काफी बढ़ जाती है और मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है।
दरअसल, दूध और पनीर जैसी चीजों में मिलावट सिर्फ ग्राहकों के साथ धोखा नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है। मिलावटी या घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। दुकानों, डेयरियों, गोदामों और खाद्य पदार्थों की सप्लाई करने वाले ठिकानों पर जांच अभियान चलाया जाता है।
मथुरा में हुई इस कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने बरामद दूध और पनीर को नष्ट कर दिया। इसका उद्देश्य साफ है—मिलावटी खाद्य पदार्थ किसी भी हालत में बाजार तक न पहुंचें। अगर इतनी बड़ी मात्रा में मिलावटी दूध और पनीर लोगों तक पहुंच जाता, तो न सिर्फ बड़ी संख्या में लोग इसे खरीद सकते थे, बल्कि इन्हीं उत्पादों से मिठाइयां और दूसरे खाद्य पदार्थ तैयार कर बाजार में बेचे जा सकते थे।
मामले को लेकर शेरगढ़ थाने में FIR भी दर्ज की गई है। यानी कार्रवाई सिर्फ छापेमारी और सामान जब्त करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। अब जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि यह मिलावटी सामान कहां से आया, इसे कहां सप्लाई किया जाना था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
त्योहारों के समय मिलावट का कारोबार इसलिए भी बढ़ने की आशंका रहती है क्योंकि बाजार में मांग अचानक बढ़ जाती है। दूध, पनीर, खोया और मिठाइयों की बिक्री कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे में कुछ कारोबारी ज्यादा मुनाफे के लालच में गुणवत्ता से समझौता करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि प्रशासन की ओर से त्योहारों से पहले विशेष अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है।
मथुरा में हुई इस कार्रवाई से एक संदेश साफ है कि त्योहार की मिठास के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि सिर्फ छापेमारी ही काफी नहीं है। जरूरी है कि जिन लोगों के खिलाफ मिलावट के पुख्ता सबूत मिलें, उनके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई हो और खाद्य पदार्थों की सप्लाई चेन पर लगातार निगरानी रखी जाए।
साथ ही आम लोगों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है। त्योहारों के दौरान दूध और उससे बने उत्पाद खरीदते समय भरोसेमंद दुकानदारों से सामान लेना, पैकेजिंग और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी देखना और किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह होने पर संबंधित विभाग को शिकायत करना जरूरी है। क्योंकि मिलावट के खिलाफ लड़ाई सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की जागरूकता से भी मजबूत होती है।
फिलहाल मथुरा में 2 हजार लीटर मिलावटी दूध और 500 किलो पनीर की बरामदगी ने त्योहारों से पहले मिलावट के कारोबार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रशासन ने सामान नष्ट कर दिया, FIR दर्ज हो गई और जांच शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि इस नेटवर्क के पीछे कौन है और आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई कितनी तेज होती है।
त्योहारों में मिठास जरूर बढ़े… लेकिन मिलावटखोरों की कमाई नहीं!
written by:- Anjali Mishra
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